बेइमानी साबित हो रहे हुए डीजीपी के आदेश

Meerut. एक थाने में चार इंस्पेक्टर्स की तैनाती में जूनियर व सीनियर का मामला आड़े आ रहा है. थाने में तैनाती के आदेश होने के बावजूद भी कई इंस्पेक्टर ड्यूटी ज्वॉइन करने से कतरा रहे हैं. कारण सीनियर इंस्पेक्टर अपने जूनियर इंस्पेक्टर के अंडर में एएसएचओ बनकर काम नहीं करना चाहते हैं.

यह है आदेश

डीजीपी ओपी सिंह ने गत 13 जून को प्रदेश के सभी जिलों के एसएसपी व एसपी को तैनाती संबंधित आदेश जारी किया था. जिसके तहत एसएसपी व एसपी को अपने सर्किल के थानों में एक थाना प्रभारी व सपोर्ट में तीन इंस्पेक्टरों की तैनाती करें.

तैनाती का तरीका

1. एसएचओ - स्टेशन होलडिंग ऑफिसर, थाना प्रभारी या भार साधक अधिकारी

कार्य क्षेत्र- तीनों अतिरिक्त प्रभारी निरीक्षक, एसएसआई के कायरें का संपूर्ण पर्यवेक्षण, गंभीर अपराधों में घटनास्थल का निरीक्षण, विवेचना, मासिक सम्मेलन, थानों के मालखाने के प्रभार एंव दायित्व सौंपने की जिम्मेदारी.

2. एएसएचओ- प्रशासनिक ऑफिसर

कार्यक्षेत्र - संपूर्ण प्रशासन एंव आंकिक कायरें का सत्यापन, सभी प्रकार की सरकारी संपत्तियों की सूची, थाने से संबंधित कार्य की जिम्मेदारी.

3. एएसएचओ

कार्यक्षेत्र- अपराध से संबंधित मामले(अभियोग पंजीकरण को छोड़कर), वांटेड बदमाशों को पकड़ने की जिम्मदारी, अपने सर्किल से शाम को चेकिंग अभियान चलाने की जिम्मेदारी.

4. एएसएचओ

कार्यक्षेत्र - थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी, अपराध के रोकथाम के लिए विभिन्न ड्यूटियां के लिए पार्टियां रवाना करना, यातायात व्यवस्था, एंटी रोमियो स्क्वायड दल प्रभारी की जिम्मेदारी.

जूनियर को बनाया एसएचओ

गौरतलब है कि एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने गत 18 जून को एक थाने में चार इंस्पेक्टरों की तैनाती की थी. कई दिन बीत गए पर अब तक किसी भी थाने में एएसएचओ ने ज्वॉइन नहीं किया है. इसके पीछे कारण वहीं सामने आ रहा है कि जितने भी इंस्पेक्टर्स को एएसएचओ बनाया गया है, वह एसएचओ से काफी सीनियर है.

डीजीपी के आदेश के अनुसार सर्किल के थानों में चार इंस्पेक्टरों की तैनाती कर दी है. अगर किसी को जूनियर या सीनियर संबंधित कोई शिकायत है तो वह मुझसे आकर मिल सकता है.

राजेश कुमार पांडेय, एसएसपी