52 लाख से ज्यादा की रद्दी का गुपचुप तरीके से पास कर दिया टेंडर

कंपनी के खिलाफ यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार ने ही दर्ज की थी एफआईआर

MEERUT। यूनिवर्सिटी में घोटलों की लिस्ट बढ़ती ही जा रही है। फिर चाहे भर्ती प्रक्रिया में एससी-एसटी, ओबीसी व दिव्यांग कोटे पर जरनल कोटे से नियुक्ति का मामला हो या फिर मोटी रकम वसूल कर मार्कशीट में मनचाहे नंबर पाने का। इसी कड़ी में मंगलवार को यूनिवर्सिटी का रद्दी घोटाला सामने आया है। जिसमें लाखों रूपये की रद्दी का टेंडर चुपचाप यूनिवर्सिटी द्वारा ही ब्लैक लिस्टेड कंपनी को दे दिया गया।

ये है मामला

दरअसल, यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार ज्ञान द्वारा रद्दी की नीलामी में अनियमितता बरतने के मामले में बनवारी पेपर मिल्स लिमिटेड के खिलाफ जुलाई 2018 में मेडिकल थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इतना ही नहीं धारा 420, 464, 120बी और धारा 13 में भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के तहत बनवारी पेपर मिल्स लिमिटेड समेत दो अन्य कंपनियों के खिलाफ भी यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार ने एफआईआर दर्ज कर उन्हें ब्लैक लिस्टिेड कर दिया था।

जरा समझ लें

1700 - कुंतल यूनिवर्सिटी में पुरानी कॉपियों की रद्दी।

22.85 - रूपये प्रति कुंतल रद्दी का रेट।

700 - कुंतल यूनिवर्सिटी में मिश्रित रद्दी।

19.85 - रुपये प्रति कुंतल मिश्रित रद्दी का रेट।

कॉपियों की रद्दी का कुल मूल्य - 38,84,500

मिश्रित रद्दी का कुल मूल्य - 13,89,500

रद्दी का मूल्य - 52,74,000

चार प्रतिशत का कमीशन

आलाधिकारियों का कहना है कि उनको ये नहीं पता कब टेंडर पास हुआ है। जबकि संबंधित अधिकारी भी टेंडर के मामले में बोलने से बच रहे हैं। मगर सूत्र बताते हैं कि इस टेंडर में 4 प्रतिशत की कमीशन भी होती है।

हुई लिखित शिकायत

यूनिवर्सिटी में इस संबंध में आशीष नाम के एक स्टूडेंट ने लिखित शिकायत भी की है। जिसके बाद मंगलवार को रजिस्ट्रार से मिलकर छात्र नेता देवेंद्र हुण, मेरठ कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष अंकित मलिक, दिनेश चौधरी, अभय मलिक, सौरभ मलिक और अंकुर सिवाच आदि ने रद्दी के टेंडर में घोटाले की बात कही। छात्रों का कहना था कि तीन गाडि़यों से ज्यादा रद्दी गुपचुप तरीके से उठवा भी ली गई है। छात्रों ने रजिस्ट्रार से कहा ये भी पूछा कि यूनिवर्सिटी ने आखिर ब्लैक लिस्टिड कंपनी को रद्दी का टेंडर कैसे दे दिया।

ये है नियम

पहले यूनिवर्सिटी द्वारा टेंडर के लिए ऐड निकाला जाता है, फिर सभी कंपनियों के टेंडर भरे जाते थे। बाद में समिति के सभी सदस्य टेंडर खोलते हैं फिर उनमें से सिलेक्शन के बाद ही किस कंपनी को टेंडर पास करना है, इस बात पर सहमति बनती है। जिसमें एफसी व रजिस्ट्रार सहित कई अधिकारियों की अहम भूमिका होती है।

इनका है कहना

मुझे नहीं पता टेंडर कब पास हुआ है। यूनिवर्सिटी में हर जिम्मेदारी बंटी हुई है। इसके संबंध में संबंधित अधिकारी से जानकारी ली जाएगी, जांच की जाएगी।

प्रो। एनके तनेजा, वीसी, सीसीएसयू

मुझे इस बारे में नॉलेज नहीं है। मुझसे पहले वाले रजिस्ट्रार की तरफ से कोई एफआईआर दर्ज है तो इस संबंध में एफसी से बात की जाएगी, पूरी जानकारी ली जाएगी।

वीपी कौशल, रजिस्ट्रार सीसीएसयू

एफआईआर पिछले एफसी के समय में हुई थी। इसलिए उसकी मुझे नॉलेज नहीं है। अभी मंगलवार को शिकायत मिलने के बाद काम बीच में रोक दिया रद्दी नहीं ले जाने दी, जांच की जाएगी।

सुशील गुप्ता, एफसी, सीसीएसयू