प्राधिकरण की योजनाएं और संपत्ति होंगी ऑनलाइन

शासन के निर्देश पर विकसित किया जा रहा है आधुनिक सिस्टम

Meerut. अवैध निर्माण कहां हैं? कौन सी कॉलोनी वैध है? किस कॉलोनी के पास सड़क और एप्रोच रोड बेहतर है? किस कॉलोनी में रिहायश न के बराबर है? ग्राहकों के ऐसे सभी सवालों का जबाव अब एमडीए एक क्लिक पर देगा. शासन के निर्देश पर एमडीए मास्टर प्लान को ऑनलाइन कर रहा है. स्कीम के तहत जीआईएस मैपिंग द्वारा बस एक क्लिक पर सड़क, बिजली, पानी, ट्रांसपोर्ट आदि की स्पष्ट जानकारी ग्राहक को मिलेगी.

यह है योजना

एमडीए सचिव राजकुमार ने बताया कि गत दिनों शासन के साथ हुई बैठक के बाद मेरठ समेत सभी विकास प्राधिकरणों को विभिन्न आवासीय योजनाओं के पूर्ण ब्योरे को ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं. इसी क्रम में प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन नितिन रमेश गोकर्ण ने चीफ कंट्री एवं टाउन प्लानर (सीसीटीपी) को यह जिम्मेदारी दी है. योजना के तहत जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) मैपिंग के माध्यम से एमडीए सीमा में स्थित वैध-अवैध निर्माणों को चिह्नित करेगा. बल्क प्रॉपर्टीज के अलावा आवासीय ईकाइयों के लैंड यूज के बारे में विस्तृत जानकारी अपलोड होगी. ग्रीन बेल्ट, फॉरेस्ट लैंड समेत विभिन्न सरकारी विभागों विभागों की जमीन पर बने निर्माणों को भी कोआर्डीनेट लोकेटर द्वारा ट्रेस किया जा सकेगा.

रुकेगी धोखाधड़ी

सचिव ने बताया कि एमडीए की वेबसाइट पर ऑनलाइन इंफॉर्मेशन अपलोड की जा रही है. कौन सी कॉलोनी अवैध है, कौन सी कॉलोनी वैध है? इसके अलावा वेबसाइट पर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं को भी ऑनलाइन किया जाएगा. सचिव ने बताया कि ऑनलाइन इंफार्मेशन से धोखाधड़ी रुकेगी और प्राइवेट कॉलोनाइजर ग्राहक को गुमराह नहीं कर सकेंगे. प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त से पहले जांच-पड़ताल की दिशा में यह प्रयास कारगर साबित होगा. साथ ही एमडीए ने दावा किया है कि जुलाई माह के अंत तक इंफार्मेशन को अपलोड कर दिया जाएगा. कोआर्डीनेट लोकेटर से कोई भी ग्राहक किसी भी आवासीय, कमर्शियल या व्यवसायिक स्कीम के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकेगा.

अमृत योजना के मद में कार्य

शासन के निर्देश पर सीसीटीपी योजना का क्रियान्वयन हो रहा है तो वहीं केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत कार्य के लिए फंडिंग की जा रही है. सचिव ने बताया कि सूबे के 61 जनपदों का चयन किया गया है, जिसमें से 42 जनपदों का मैप जीआईएस मैपिंग के लिए मुख्यालय को उपलब्ध करा दिया गया है.

जीआईएस मैपिंग के जरिए एमडीए की विभिन्न आवासीय योजनाओं, वैध-अवैध कॉलोनियों, ग्रीन बेल्ट आदि का पूर्ण ब्योरा ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा. एमडीए की वेबसाइट पर जाकर एक क्लिक के बाद ग्राहक को संपत्ति के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी.

राजकुमार, सचिव, एमडीए