बरेली : बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर हो रही श्री रामकथा में भक्तों को कथा सुनाते हुए व्यास पं। प्रभाकर त्रिपाठी ने कहा कि जिस तरह भारतवर्ष में पूर्व में लिंगनाथ पश्चिम में सोमनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम उत्तर में केदारनाथ और मध्य में बाबा विश्वनाथ विराजमान है, उसी प्रकार बरेली में मध्य में बाबा त्रिवटीनाथ तथा उनके चारो ओर बाबा अलखनाथ बाबा धोपेश्वर नाथ बाबा मढ़ीनाथ बाबा वनखंडी नाथ विराजमान हैं। कथा व्यास ने कहा कि बाबा त्रिवटीनाथ तीन वट वृक्ष के बीच में विराजमान है, और वट का अर्थ होता है विश्वास और विश्वास का अर्थ है भगवान शंकर। भगवान शंकर तीन प्रकार के शूल के निर्मूलन के लिए शूलपाणि कहे जाते हैं।

बालक का जीवन कुम्हार की मिट्टी के समान

कथा व्यास ने कहा कि त्रेता युग का यह तथ्य आज का सत्य है। एक बालक का जीवन कुम्हार के चाक पर रखी उस मिट्टी की तरह है जो कि यदि सही हाथों से बनाई जाती है, तो वह पूजा के लिए मूर्ति भी बन सकती है जिसकी पूजा की जा सके तथा सुराही का निर्माण भी हो सकता है। जिससे अति शीतल तथा मीठा जल उपलब्ध हो सकता है। श्रीरामकथा मनुष्य के जीवन को सुंदर तथा निर्मल बनाती है। कथा के बाद आरती और प्रसाद का वितरण हुआ। जिसमें मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, हरि ओम अग्रवाल और मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल आदि मौजूद रहे।