- केरल में आई बाढ़ में फंसे हैं राजधानी में रहने वालों के परिजन

- बिजली और पानी के बिना रहने को मजबूर हैं लोग

- फोन से भी नहीं हो पा रहा है संपर्क, कई को किया गया रेस्क्यू

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LUCKNOW : केरल में भारी बारिश के चलते आई बाढ़ से जन-जीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया है. लोगों के घर पूरी तरह से जलमग्न हो गये हैं. बाढ़ के चलते जहां सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गये हैं. यहां बाढ़ में फंसे लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है. किसी ने कैंप में शरण ले रखी है तो किसी ने अपने रिश्तेदारों के घर पर शरण ले रखी है. देश के कोने-कोने से लोग करेल में रहने वाले अपने परिजनों, दोस्तों, रिश्तेदारों का हाल जानने के लिए परेशान हैं. वह उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं. राजधानी में भी कुछ ऐसे परिवार हैं जो वहां पर रहने वाले अपने परिजनों और रिश्तेदारों का हाल जानने के लिए बेकरार हैं. उन्होंने बताया कि मौसम खराब होने की वजह से बहुत मुश्किल से उनसे फोन पर संपर्क हो पा रहा है. ऐसे ही कुछ परिवारों से रविवार को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने जब उनसे मुलाकात की तो उनका दर्द आंसू से छलक उठा. पेश है संजीव पांडेय की एक रिपोर्ट..

आया फोन तो मिली राहत

जानकीपुरम निवासी सुरेश ने बताया कि उनकी भतीजी और उसके पति प्रसाद पैंडालोम में रहते हैं. जिस दिन से टीवी पर बारिश के चलते वहां पर बाढ़ की जानकारी मिली, तभी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सम्पर्क नहीं हो सका. हम लोग रोज टीवी देखते रहते. एक दिन भतीजी ने किसी दूसरे का मोबाइल लेकर हम लोगों से संपर्क किया तब जाकर हमें राहत मिली. उसने बताया कि वह लोग बेटी के साथ रेस्क्यू कैम्प में हैं. वहीं पर खाना और सोना हो रहा है. लोगों में बाढ़ की वजह से काफी खौफ व्याप्त है.

आर्मी के जवान से मांगा फोन और दी सकुशल की सूचना

विकासनगर निवासी राजीव नायर ने बताया कि वह मूलरूप से केरल के रहने वाले हैं. वह यहां पर अपने परिवार के साथ रहते हैं जबकि उनके पिता बिंदु नायर और मां विजयम्मा आज भी केरल के पठन्नम थिठा में ही रहती हैं. बारिश के चलते उनके पूरे घर में पानी भर गया है. टीवी से उन्हें जब इसकी जानकारी मिली तो घर वालों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी. वह भी यह जान रहे थे कि हम लोग परेशान हो रहे होंगे. ऐसे में रेस्क्यू कैम्प में आर्मी के जवानों और मीडिया के लोगों से मोबाइल मांग कर उन्होंने खुद के सकुशल होने की सूचना दी.

दुआ कर रहे हैं

जानकीपुरम में निवासी वेणु गोपाल ने बताया कि मेरा घर त्रिवेल्ला में है. बाढ़ का कहर सबसे अधिक इसी इलाके में है. इसकी जानकारी मिलते ही मैंने अपने पिता चंद्रशेखर और मां पुनम्मा से बात करने की कोशिश की, लेकिन उसके बाद संपर्क नहीं हो सका. ऐसे में मैंने वहां पर अपने एक पुराने दोस्त को भेज कर उनके मोबाइल पर बात की. पता चला कि हमारे क्षेत्र में लाइट कटी हुई है. ऐसे में मोबाइल चार्ज नहीं हो पा रहा है. घर में पानी भर चुका है, जिसकी वजह से पैरेंट्स घर के ऊपर के फ्लोर में हैं. फिलहाल वह सुरक्षित हैं. ऊपर वाले से यही दुआ मांग रहा हूं कि जल्द ही वहां पर जन-जीवन सामान्य हो.

फोन आया तो आई जान में जान

गुडंबा के गायत्री मंदिर के पास रहने वाले सुनील नौकरी के चलते राजधानी में रह रहे हैं. उनकी पत्नी और बेटी केरल में रहती हैं. बाढ़ की सूचना मिलते ही उन्होंने घरवालों से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं हो सकी. पत्नी और बेटी वहां पर किस हाल में होंगे यह सोचकर नींद नहीं आती थी. उन्होंने वापसी की कोशिश की तो पता चला कि वहां पर ट्रेनें और फ्लाइट सब बंद हैं, लेकिन बीते शनिवार को केरल से एक फौजी के फोन से उनके पास फोन आया तो उनकी जान में जान आई. फौजी के फोन से उन्होंने अपनी बेटी और पत्नी से बात की. उन्होंने बताया कि मेरा घर चेंगूर पेंडांड के पास है. वहां से आर्मी ने पत्‍‌नी और बेटी को रेस्क्यू कर निकाला. अब वे रेस्क्यू कैम्प में है.

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पानी के लिए आता है टैंकर

शास्त्रीनगर निवासी सुरेन्द्र ने बताया कि उनका बेटा किशन वहां पर जॉब करता है. इस समय वह अपने परिवार के साथ वही त्रिवेंद्रम में है. उन्होंने बताया कि बेटे से लगातार संपर्क तो बना हुआ है, लेकिन वहां पर बिजली और पानी की सप्लाई बंद हो गई है. दूध भी नहीं मिल रहा है. पानी के लिए एक टैंकर सुबह आता है, जिससे दो-तीन बाल्टी पानी ही मिल पा रहा है. उन्होंने बताया कि पहले तो यह लगा कि दो तीन दिन बाद बारिश बंद हो जाएगी, लेकिन अब बेटा वहां से निकल भी नहीं पा रहा है. बस, ट्रेन और फ्लाइट्स सब बंद है.

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घर में कैद हो गए परिजन

विकास निवासी एमएम जॉनी ने बताया कि उनकी बुआ और मां के साथ कई परिजन वहां रहते हैं. बाढ़ की सूचना मिलते ही उन्होंने अपने परिजनों का हाल-चाल लिया. सभी सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया वहां पर बिजली और पानी की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण स्थितियां खराब हो गई हैं. लोग अपने घरों में कैद हो गए हैं. खाने-पीने की दिक्कतों का सामना लोगों को करना पड़ रहा है.

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नहीं मनाया जाएगा ओणम

केरल समाज से जुड़े लोगों ने बताया कि वहां पर आई बाढ़ के चलते वहां पर मुख्यमंत्री ने इस बार ओणम पर किसी तरह का प्रोग्राम आयोजित ना करने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में राजधानी में भी इस बार ओणम नहीं मनाया जाएगा. अगले महीने तीन सितंबर को ओणम मनाए जाने की तैयारी थी, लेकिन वहां पर आई बाढ़ के चलते अब ओणम नहीं मनाया जाएगा.

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लखनऊ के व्यापारी भी फंसे

लखनऊ के व्यापारी रामधीरज भी केरल में आई भीषण बाढ़ में फंसे हुए हैं. उन्होंने फोन पर बताया कि बाढ़ में सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि लखनऊ और आस-पास के क्षेत्रों के रहने वाले तमाम लोग फंसे हुए हैं. यह लोग यहां पर व्यापार करते हैं या किसी प्राइवेट जॉब में हैं. सभी को यही इंतजार है कि कब बाढ़ का पानी कम होगा और वह यहां से वापस घर पहुंच सकेंगे.