-ईसी की बैठक में रखा गया प्रस्ताव, शासन को भेजा गया

-बैठक में 61 टीचर्स के प्रमोशन को हरी झंडी

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LUCKNOW: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी मेडिकोज को सलाना फीस में कुछ राहत दे सकती है. इसके लिए गुरुवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में पांच वर्ष की बजाए साढ़े चार वर्ष की ही फीस लेने का प्रस्ताव रखा गया. कार्य परिषद ने इस प्रस्ताव को शासन को भेजने का निर्णय लिया है. शासन से अनुमति मिली तो हर वर्ष एडमिशन लेने वाले 250 एमबीबीएस व 70 बीडीएस मेडिकोज की फीस कम हो जाएगी. कार्य परिषद की बैठक में कुल 18 प्रस्ताव रखे गए थे.

साढ़े चार साल चलती है क्लास

गौरतलब है कि एमबीबीएस का कोर्स साढ़े चार वर्ष का है. इसके बाद एक वर्ष इंटर्नशिप होती है. कोर्स चार वर्ष छह माह का होने के बावजूद फीस पूरी पांच वर्ष की वसूली जाती है. इसको लेकर केजीएमयू की डीन ने अंतिम वर्ष में छह माह की ही फीस लेने का प्रस्ताव रखा था. चूंकि पूरी पांच वर्ष की फीस लेने का आदेश शासन का है और सभी यूनिवर्सिटी और मेडिकल कॉलेजों में ली जाती है इसलिए केजीएमयू की कार्य परिषद ने मामले को शासन भेजने का निर्णय लिया. शासन से अनुमति मिली तो मेडिकोज को बड़ी राहत मिल सकती है.

इन्हें भी मिली अनुमति

बैठक में आर्थोपेडिक विभाग के डॉ. आशीष कुमार को स्पो‌र्ट्स मेडिसिन विभाग के एचओडी नियुक्त करने पर सहमति दे दी गई. इसके अलावा डॉ. अजय वर्मा को रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग में वापस भेजने के आदेश को भी सहमति दे दी गई. वहीं सर्जरी विभाग से डॉ. पंकज कुमार को सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग में वापस करने का आवेदन खारिज कर दिया गया. इसके अलावा ईसी ने सीवीटीएस के डॉ. शेखर टंडन के सस्पेंशन आदेश पर मुहर लगा दी.

ये मामले भी शासन को

कार्य परिषद की बैठक में एम्स जोधपुर के निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा के लियन के संबंध में शासन को अनुस्मारक भेजने का निर्णय लिया गया है. गौरतलब है कि केजीएमयू अधिकतम पांच वर्ष तक ही किसी फैकल्टी को अवकाश (लियन या लीव विदाउट पे) देता है. डॉ. संजीव का पांच वर्ष का लियन जून में ही पूरा हो गया था. नियमत: उन्हें वापस सर्जरी विभाग में अपनी सेवाएं देनी थी, लेकिन उन्होंने वापस ज्वाइन नहीं किया और केंद्र सरकार ने उन्हें जोधपुर एम्स का दोबारा अगले पांच वर्ष के लिए निदेशक बना दिया. इसके लिए केजीएमयू ने डॉ. संजीव को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था. जिसके जवाब में डॉ. संजीव ने केजीएमयू से देशहित में लियन को बढ़ाने की मांग की थी. जिसे केजीएमयू ने शासन को भेज दिया है.

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डॉ. केके सिंह को ज्वाइनिंग अभी नहीं

कार्य परिषद ने सर्जरी विभाग के डॉ. केके सिंह को फिलहाल ज्वाइन न कराने का निर्णय लिया है. केजीएमयू इस मामले में रिव्यू पेटीशन फाइल करने के लिए लीगल ओपीनियन लेने का निर्णय लिया है. इसके अलावा केजीएमयू में तैनात करीब 40 से अधिक मेडिकल आफीसर्स को शिक्षक का दर्जा दिए जाने का भी प्रस्ताव रखा गया. जिससे उन्हें भी टीचर्स की भांति भत्ते व अन्य सुविधाएं मिल सकें. इस मामले को भी कार्य परिषद से शासन को संदर्भित कर दिया है. बैठक में कुल 13 मामले मेन एजेंडा में रखे गए थे. जबकि पांच बिंदु एनी अदर एजेंडा में रखे गए थे.

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61 टीचर्स को मिला प्रमोशन

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद की बैठक में 39 टीचर्स को एसोसिएट प्रोफेसर और 22 को प्रोफेसर पद पर पदोन्नति को अनुमोदित किया गया. इनमें न्यूरो सर्जरी, इंडोक्राइन, एनाटमी, गस्ैट्रोइंट्रोलॉजी, पेरियोडांटिक्स, प्रास्थोडॉन्टिक्स, डीपीएमआर, कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री विभाग, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, ओरल मेडिसिन, रेस्पिरेटरी मेडिथ्सन, ओरल पैथोलॉजी, कार्डियोलॉजी विभाग, पैथोलॉजी विभाग, वृद्धावस्था मानसिक रोग विभाग, पीडियाट्रिक्स, प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री, ट्रॉमा सर्जरी, फिजियोलॉजी विभाग, पीडियाट्रिक सर्जरी, मानसिक चिकित्सा विभाग, क्लीनिकल हिमैटोलॉजी के संकाय सदस्य हैं. इनमें असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर पर 39 और एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर 22 को प्रमोशन किया गया है.