- 2.50 करोड़ से खरीदे थे 2700 कंप्यूटर

-3400 बारकोड स्कैनर, प्रत्येक 8000

- प्रिंटर 1700, प्रत्येक की कीमत 9000

- 6.93 करोड़ का डाटा सेंटर फांक रहा धूल

-450 वाई फाई एक्सेस प्वाइंट लगाए गए थे, प्रत्येक की कीमत 70 हजार

- 7 से 8 हजार ओपीडी

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LUCKNOW: महंगे कंप्यूटर और प्रिंटर पर करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में ओपीडी अब तक ऑनलाइन नहीं हो सकी. नतीजतन मरीजों के पर्चे ऑनलाइन नहीं किए जा सके. सही नहीं 50 रुपए के रजिस्ट्रेशन कार्ड की सुविधा भी बंद कर दी गई जबकि वसूली बराबर हो रही है.

सिस्टम गायब, जो बचे उन पर चलती फिल्म

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में दो वर्ष पूर्व करोड़ों की लागत से महंगे कंप्यूटर और प्रिंटर इसलिए लगाए गए थे कि मरीजों की बीमारी की डिटेल और दवाओं को लिखकर उसे पर्चे पर प्रिंट किया जा सके. मरीज का पर्चा खो भी गया तो केजीएमयू के पास उसका रिकॉर्ड रहता, लेकिन सब पूरी तरह से शुरू होने से पहले ही पूरा सिस्टम ठप हो गया. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने ओपीडी की पड़ताल की तो पता चला बहुत से कमरों में लगे कंप्यूटर गायब हो चुके हैं. जहां हैं भी वह बंद पड़े हैं. इक्का दुक्का जो चल रहे हैं उन पर यू ट्यूब पर मूवी और गाने देखे जा रहे थे. डॉक्टर मरीजों को ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन की बजाए पेन से पर्चे पर दवाएं और बीमारी की जानकारी को लिखते नजर आए.

हर बार नया रजिस्ट्रेशन

केजीएमयू में पहले सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीपीएमएस) लागू था, लेकिन सीपीएमएस में कथित घोटाले के कारण उसे बंद कर दिया गया. अब केंद्र सरकार का ई हॉस्पिटल प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन नए सिस्टम के साथ ही ओपीडी में रजिस्ट्रेशन कार्ड की व्यवस्था समाप्त कर दी गई. अब सिर्फ एक रुपये के पर्चे पर बार कोड ही लिखा जा रहा है. जिसके कारण कई दूर दराज से आने वाले मरीजों को बार-बार उनका रजिस्ट्रेशन कराना पड़ रहा है. शुक्रवार को बलरामपुर से आए राम औतार ने बताया कि पिछले हफ्ते 51 रुपए देकर पर्चा बना था. इस बार भी 51 रुपए लिये गये. उन्हें जानकारी ही नहीं थी कि रजिस्ट्रेशन का 50 रुपए छह माह में एक बार के लिए है. न ही कहीं इसकी जानकारी लिखी है. ऐसे में सैकड़ों मरीज रोजाना केजीएमयू की लूट का शिकार हो रहे हैं.

दावे हजार, सुविधा नहीं

केजीएमयू प्रशासन ने पिछले वर्ष सीपीएमएस को बंद करके ई-हॉस्पिटल को लागू किया था. उस दौरान केजीएमयू प्रशासन ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि मरीजों की सुविधाएं संजय गांधी पीजीआई की तरह ही ऑनलाइन हो जाएंगी. जांच से लेकर दवा और पेमेंट तक के लिए मरीजों को भटकना नहीं पड़ेगा, लेकिन साल भर बाद भी मरीजों की दिक्कतें जस की तस बनी हुई हैं.

प्रसूताओं को सुविधा ऑनलाइन

केजीएमयू के आईटी सेल ने शुक्रवार को क्वीन मेरी में गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जीएसएसके) को ई-हॉस्पिटल सेवा से जोड़ दिया. जीएसएसके में गर्भवती महिलाओं को सभी प्रकार की जांच से लेकर दवाओं तक की सुविधा नि:शुल्क देनी होती है. आईटी सेल प्रभारी डॉ. संदीप भट्टाचार्य ने बताया कि अब जनरल वार्ड की सभी गर्भवती महिलाओं को किसी भी सुविधा के लिए पैसा नहीं देना होगा. पहली बार मरीज ओपीडी आएंगे तो रजिस्ट्रेशन का 50 रुपए और एक रुपए का पर्चा बनवाना होगा., लेकिन जैसे ही उसके गर्भवती होने की पुष्टि होगी डॉक्टर के लिखने के बाद उसकी सभी सेवाएं नि:शुल्क हो जाएंगी. उसके बाद हर बार की जांचें, अल्ट्रासाउंड, डिलीवरी का चार्ज, बेड दवाएं सब नि:शुल्क होगा.

इनडोर में दवाएं ऑनलाइन

डॉ. संदीप भट्टाचार्य ने बताया कि सभी विभागों में मरीजों की भर्ती सेवा को ऑनलाइन कर दिया गया है. अब सभी मरीजों की भर्ती यानी डंडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) और डिस्चार्ज ई-हॉस्पिटल सिस्टम पर ही होगा. वार्ड में मिलने वाली सभी दवाएं भी ऑनलाइन हैं. इससे दवाओं का मिसयूज भी रूका है.

पैथोलॉजी सेवा भी होगी ऑनलाइन

अभी तक केजीएमयू की पैथोलॉजी सेवा को ऑनलाइन नहीं किया जा सका है. जिसके कारण मरीज पैथोलॉजी से लेकर ट्रॉमा सेंटर के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. पैथोलॉजी में होने वाली बहुत सी जांचों के सैंपल पैथोलॉजी में जमा होते हैं, लेकिन उसका पैसा पीआरओ ऑफिस में जमा होता है. मरीजों को दो-दो बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. डॉ. संदीप भट्टाचार्य ने बताया कि आटोएनालाइजर मशीनों से होने वाली जांचों के इंटीग्रेशन का काम चल रहा है. अगले एक माह के अंदर रिपोर्ट ऑनलाइन पहुंचेगी. जिससे डॉक्टर कहीं भी कंप्यूटर खोलकर देख सकेंगे. जबकि एमआरआई की रिपोर्ट को ऑनलाइन कर दिया गया है. एमआरआई की रिपोर्टिग शुक्रवार से ऑनलाइन कर दी गई है. विभागों में लगे कंप्यूटर पर एमआरआई की इमेजेज पहुंचने लगी हैं. वार्डो में नर्सो, रेजीडेंट के पास कंप्यूटर और पासवर्ड दे दिए गए हैं.

जरूरतमंदों को सुविधा भी ऑनलाइन

डॉ. संदीप भट्टाचार्य ने बताया कि सबसे बड़ी दिक्कत बीपीएल, असाध्य, विभन्न कैटेगरी के मरीजों को इलाज मिलने में होती थी. इंडेंट की दवा मिलने में कई दिन लगते थे. अब इसे ऑनलाइन कर दिया गया है. हर मरीज को कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से दवा दी जा रही है.

कोट-

पुराना सिस्टम फेल हो गया था जिसके कारण ई हॉस्पिटल लागू किया गया. पिछले एक वर्ष में केजीएमयू का एक भी पैसा इस सिस्टम के लिए खर्च नहीं हुआ. पुराना सिस्टम ओपीडी में लागू किया गया था जो सफल नहीं रहा. इसे आईपीडी से लागू किया जाता है. इसलिए ई हॉस्पिटल को आईपीडी से लागू किया गया है. ओपीडी में एक एक डॉक्टर 300 से 400 मरीज देखता है ऐसे में ओपीडी का ब्यौरा फिलहाल ऑनलाइन फीड कर पाना संभव नहीं है. अन्य सभी सेवाएं चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन की जा रही हैं.

डॉ संदीप भट्टाचार्य, प्रभारी आईटी सेल, केजीएमयू