LUCKNOW: किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में लगातार दूसरी बार दिल्ली के एक बड़े प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर्स ने आकर 45 वर्ष के मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट किया, जिसमें केजीएमयू के डॉक्टर्स सहित 90 लोगों की टीम लगी रही और करीब 11 घंटे में लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की गई। केजीएमयू की टीम ने गुरुवार सुबह पांच बजे से ही ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। डॉक्टर्स के अनुसार मरीज और लिवर डोनेट करने वाले दोनों का स्वास्थ्य स्थिर है।

  • -90 डॉक्टर्स, कर्मचारियों की टीम ने किया ट्रांसप्लांट
  • -7 से 8 लाख का आएगा खर्च
  • - 5 बजे सुबह शुरू किया गया था लिवर ट्रांसप्लांट
  • -11 घंटे का ट्रांसप्लांट में लगा समय
  • -मरीज और डोनर दोनों की हालत स्थित

6 लोगों की जांच की, निकले अनफिट

डॉक्टर्स के अनुसार 45 वर्षीय मरीज को लिवर उनकी पत्‍‌नी के 35 वर्षीय भाई ने डोनेट किया है। इस प्रकार से एक भाई ने अपने लिवर का हिस्सा देकर अपनी बहन के सुहाग को बचा लिया। दरअसल, लिवर सिरोसिस से पीडि़त मरीज को लिवर देने के लिए डॉक्टर ने नजदीकी रिश्तेदारों से कहा। इसके लिए पत्‍‌नी, बहनें व दूसरे सदस्य लिवर देने को राजी हुए। लिवर देने वालों की जांच शुरू हुई। पहले पत्‍‌नी की जांच की गई, लेकिन वह लिवर डोनेट करने के लिए फिट नहीं मिली। फिर बहनों व दूसरे सदस्य राजी हुए तो वह भी अनफिट निकल गए। एक एक कर परिवार के छह सदस्यों का लिवर भी ट्रांसप्लांट के लिए ठीक नहीं निकला। आखिर में बहन का सुहाग बचाने के लिए भाई पवन ने लिवर देने का फैसला किया। वह जांच में फिट मिला तो उसका लिवर डोनेशन के लिए लिया गया। डॉक्टर्स के अनुसार प्रत्यारोपण के बाद मरीज की तबीयत स्थिर बनी है। उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है। वहीं पवन की सेहत भी ठीक है। उसे होश आ गया है। इससे पहले केजीएमयू में 14 मार्च को पहला लिवर ट्रांसप्लांट किया गया था।

लिवर सिरोसिस की चपेट में

सरोजनीनगर निवासी यह मरीज लिवर सिरोसिस की चपेट में था। कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी फायदा नही हुआ। आए दिन तबियत बिगड़ रही थी और करीब एक वर्ष पहले केजीएमयू में दिखाया था। डॉ। अभिजीत चंद्रा ने जांच के बाद लिवर सिरोसिस बताया और लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। करीब एक माह पहले मरीज के पेट में पानी भरने के कारण उसे गैस्ट्रो सर्जरी में भर्ती कराया गया था। लिवर फेल होने से पीलिया की समस्या लगातार बढ़ती जा रही थी, जिसके बाद केजीएमयू के डॉ। विवेक गुप्ता ने जल्द से जल्द प्रत्यारोपण की बात कही।

सिर्फ आठ लाख में लिवर ट्रांसप्लांट

केजीएमयू के डॉक्टर्स का दावा है कि यहां पर होने वाला लिवर ट्रांसप्लांट कारपोरेट अस्पतालों की तुलना में काफी कम है। केजीएमयू के प्रवक्ता के मुताबिक केजीएमयू में करीब सात से आठ लाख का ही खर्च आने का अनुमान है जबकि कारपोरेट अस्पतालों में 70 से 80 लाख रुपए तक कुल खर्च आता है। इस प्रकार से केजीएमयू में बहुत कम खर्च है।

इस टीम ने किया प्रत्यारोपण

केजीएमयू के इतिहास में दूसरा लिवर का प्रत्यारोपण किया गया। इस टीम में दिल्ली के प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर के अलावा केजीएमयू के डॉ। अभिजीत चंद्रा, डॉ। विवेक गुप्ता, डॉ। विशाल गुप्ता, डॉ। प्रदीप जोशी, एनेस्थीसिया से डॉ। मो। परवेज, डॉ। अनीता मलिक, डॉ। तन्मय तिवारी, डॉ। एहसान, रेडियोलॉजी से डॉ। नीरा कोहली, डॉ। अनित परिहार, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग से डॉ। तूलिका चन्द्रा, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ। प्रशान्त, डॉ। शीतल वर्मा व सीएमएस डॉ। एसएन शंखवार ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉक्टर्स के अनुसार यह जीवित अंग दाता से प्राप्त लिवर का प्रत्यारोपण था।