- दोनों संस्थानों को लेटर लिख मांगी पूरी जानकारी

- सॉफ्टवेयर के नाम पर केजीएमयू से वसूले थे 90 लाख

- आईटी सेल हुआ था करोड़ों का घोटाला

- दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने किया था पूरे मामले का खुलासा

sunil.yadav@inext.co.in

LUCKNOW: किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू) में हुए आईटी सेल और कंप्यूटर खरीद घोटाले का जांच का दायरा एम्स जोधपुर और एम्स ऋषिकेश तक बढ़ गया है. केजीएमयू के रजिस्ट्रार ने मामले में दोनों एम्स के निदेशकों को पत्र लिखकर केजीएमयू के आईटी सेल से पूर्व में जुड़ी कंपनियों के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी है. गौरतलब है कि दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने आईटी सेल से जुड़े मामले को प्रमुखता से उठाया था जिसके बाद केजीएमयू की ओर से गठित कमेटी मामले की जांच कर रही है.

कमेटी ने मांगी अहम जानकारी

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार दोनों ही एम्स के निदेशकों को भेजे गए पत्रों में एल्गोरिद्म इनफोवेब लि. और फ्ल्यूड फैंटेसी कंपनियों से संबंधित अहम जानकारी देने को कहा गया है. एम्स जोधपुर और एम्स ऋषिकेश के निदेशकों के नाम यह पत्र केजीएमयू के रजिस्ट्रार राजेश कुमार राय की ओर से भेजे गए हैं. केजीएमयू की आईटी सेल में हुई धांधली के मामले की जांच कर रही कमेटी को आशंका है कि जिन कंपनियों को सीपीएमएस के नाम पर पेमेंट किया गया, उन्होंने वही सॉफ्टवेयर जोधपुर व ऋषिकेश एम्स को दे दिया है. जबकि सॉफ्टवेयर को बनाने के लिए पेमेंट केजीएमयू ने किया था. दोनों ही निदेशकों के अलावा केजीएमयू की आईटी सेल के पूर्व इंचार्ज डॉ. आशीष वाखलू, गठिया रोग विभाग के डॉ. अनुपम वाखलू, केजीएमयू के वित्त नियंत्रक और फ्ल्यूड फैंटेसी के विक्रांत कुमार को नोटिस जारी कर उनके कंपनियों से जुड़े होने, पेमेंट सहित अहम जानकारी तलब की गई है.

सॉफ्टवेयर की कॉपी भी मांगी

दोनों ही निदेशकों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि क्या एल्गोरिद्म इनफोवेब लि. और फ्ल्यूड फैंटेसी से दोनों एम्स में कोई सर्विस ली गई है? ऐसा है तो सर्विस या सॉफ्टवेयर के लिए किए गए पेमेंट्स की जानकारी दें. दोनों ही कंपनियों द्वारा जमा किए गए सभी दस्तावेज और संस्थान के साथ साइन किए गए कागजों की फोटोकॉपी,और इनकंपनियों को किए गए पेमेंट की डिटेल्स सहित अन्य जानकारी मांगी गई है. साथ ही इन कंपनियों द्वारा सप्लाई किए गए या बेचे गए सॉफ्टवेयर की कॉपी भी देने को कहा गया है.

कार्य परिषद ने दिए थे जांच के आदेश

केजीएमयू के सेंट्रल पेशेंट मैनेजमेंट सिस्टम (सीपीएमएस) में पिछले वर्ष घोटाले के आरोप लगे थे. आरोप लगा था कि यहीं के डॉक्टर्स ने खुद ही सॉफ्टवेयर बनाया और खुद की कंपनी बनाकर उसे पेमेंट कर दिया. सॉफ्टवेयर के नाम पर 90 लाख सहित करोड़ों के पेमेंट यहां के डॉक्टर्स ने मानकों को ताक पर रखते हुए किए. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट द्वारा खबर प्रकाशित किए जाने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की और प्राइमरी जांच में धांधली की पुष्टि हुई थी. इस कमेटी में केजीएमयू के दो प्रोफसरों के अलावा एकेटीयू के वीसी भी शामिल थे. जिसमें उन्होंने रिकवरी और कार्रवाई की संस्तुति की थी. जिसके बाद से केजीएमयू की कार्यपरिषद ने जांच कमेटी गठित कर आगे कार्रवाई के निर्देश दिए थे. जिसकी जांच अभी तक जारी है.

कोट-

मामले की जानकारी नहीं है. जानकारी मिलने पर सूचित किया जाएगा.

प्रो. संतोष कुमार, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू