जिम्नास्टिक हॉल के लोगों ने परिजन से कन्फर्म किया होता तो न होती घटना

दूसरे स्टेडियम व स्पो‌र्ट्स ग्राउंड पर ट्रेनिंग लेने वाले बच्चों के परिजन भी सहमे

PRAYAGRAJ: जिम्नास्टिक हॉल से बच्चे को बुलाकर अपहरण कर लेने की घटना ने तमाम स्टेडियम और स्कूलों में स्पो‌र्ट्स की ट्रेनिंग लेने के साथ समय कैंप में एपीयर हो रहे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। बच्चा प्रिमाइस में रहने तक ही कोच उसकी निगरानी करते हैं। ज्यादातर स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं और न ही यह क्रास चेक करने का इंतजाम है कि बच्चा सही आदमी के हाथ में जा रहा है या नहीं।

हजारों बच्चे लेते हैं जगह-जगह ट्रेनिंग

प्रयागराज में स्पो‌र्ट्स को लेकर बच्चों में क्रेज है। शहर में तीन सरकारी स्पो‌र्ट्स स्टेडियम है। दर्जनभर से अधिक अन्य विभागीय ग्राउंड और स्कूल ग्राउंड पर विभिन्न स्पो‌र्ट्स की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें हजारों बच्चे सुबह और शाम ट्रेनिंग लेने के लिए पहुंचते हैं। बच्चों को या तो पैरेंट्स खुद छोड़ने आते हैं या फिर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेते हैं। स्पो‌र्ट्स ग्राउंड के बाहर बच्चे को ड्राप करने के बाद अगले दो घंटे तक उन्हें बच्चे के बारे में कोई सूचना नहीं मिलती।

घर से कन्फर्म किया होता तो न होता अपहरण

यही सही है कि जो ड्राइवर रनवीर को जिमनास्टिक हॉल से लेने पहुंचा था वह तीन महीने पहले भी वहां आता-जाता था। यहां सीसीटीवी कैमरा लगा होता तो पता चल जाता कि जो ड्राइवर बच्चे को लेने पहुंचा है वह उसे ड्राप करने नहीं आया था। ऐसा होता तो कोच के लेवल पर ही घटना को रोका जा सकता था। बच्चा बीच में जा रहा है तो सिर्फ वर्बल कम्युनिकेशन पर बच्चे को छोड़ दिया गया। कोच या यहां के किसी कर्मचारी ने इसे रनवीर के फैमिली मेम्बर्स को कॉल करके कन्फर्म करने की कोशिश की होती तो भी घटना रोकी जा सकती थी। इसे लेकर जिम्नास्टिक हॉल पहुंचे लोग कानाफूसी करते दिखे। दबी जुबान उनका कहना था कि कंफर्मेशन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू होनी चाहिए। इससे कम से कम सच्चाई का पता तो चल जाता।