कब हुई भारत में पहली हड़ताल
(फोटो कैप्‍शन - शुक्रवार को ट्रेड यूनियनों की देशव्‍यापी हड़ताल के दौरान कोलकाता में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की एक समर्थक पार्टी का झंडा लेकर हड़ताल का समर्थन करते हुए।)
यहां से हुई शुरुआत
भारत के श्रमिक संगठन ने सबसे पहली हड़ताल का बिगुल फूंका मार्च 1862 में। आपातकाल के ठीक नौ साल के भीतर। ये वह समय था जब हावड़ा स्‍टेशन के करीब 1200 रेलवे वर्कर्स एकसाथ हड़ताल पर चले गए। इन वर्कर्स की मांग थी दिन के बंधे हुए आठ घंटे काम की। 1877 में नागपुर की एक मिल के श्रमिकों ने वेतन वृद्धि की मांग के साथ हड़ताल कर दी। इसके बाद 1882 और 1890 के बीच मुंबई और मद्रास प्रेसीडेंसी में 25 बड़ी और अहम हड़तालें हुईं। 1881 में बंगाल में जूट वर्कर्स वेतन वृद्धि की मांग के साथ दो बार हड़ताल पर गए। इसके बाद 1885 में एक बार फिर से जूट वर्कर्स ने छह दिन की हड़ताल की। इन्‍हीं जूट वर्कर्स ने 1889 में फिर से 8 दिनों की हड़ताल की। इसी दौरान प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों के भड़के गुस्‍से को काबू करने के लिए पुलिस को ताकत भी आजमानी  पड़ी। इस तरह से उभरते औद्योगिकीकरण पर खुद के साथ हो रहे शोषण को रोकने के लिए समय-समय पर श्रमिक वर्ग आवाज उठाता रहा। कभी खुद पर बढ़ रहे काम के बोझ के खिलाफ, तो कभी कम मेहताने को लेकर श्रमिक वर्ग एकजुट होता रहा है।


कब हुई भारत में पहली हड़ताल

(फोटो कैप्‍शन - कोलकाता में शुक्रवार को हड़ताल के दौरान सड़कों पर कुछ यूं पसरा है सन्‍नाटा।)
इन्‍होंने हमेशा किया समर्थन
1874 में बंगाल शशिपदा बनर्जी और मुंबई के एन एम लेखंडे ने श्रमिकों का साथ देने का प्रयास किया। इस क्रम में शशिपदा बनर्जी ने ऐसे श्रमिकों को लेकर एक नई मैग्‍ज़ीन पब्‍लिश की। इसका नाम था 'इंडियन वर्कर्स'। वहीं 1898 में लेखंडे में मुंबई में एक मैग्‍ज़ीन प्रकाशित की। इसका नाम था 'दीनबंधु'। ऐसे श्रमिकों की मदद करने के लिए ब्राह्मो समाज भी शशिपदा बनर्जी के नेतृत्‍व में आगे आया और 1884 में इन जूट वर्कर्स की मदद के लिए नाइट स्‍कूल और बैंकों की स्‍थापना की। इस तरह के काफी प्रयासों के बाद श्रमिक वर्ग के स्‍तर में काफी हद तक सुधार आया। मसलन, 1881 में पहला फैक्‍ट्री एक्‍ट तैयार हुआ। इसके अंतर्गत फैक्‍ट्रियों में 7 साल या इससे कम उम्र के बच्‍चों से श्रम करवाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके अलावा सात साल से 12 साल के बीच की उम्र के बच्‍चों को श्रम करने पर उन्‍हें 4 दिन की छुट्टी देना भी निर्धारित किया गया।    


कब हुई भारत में पहली हड़ताल
(फोटो कैप्‍शन - शुक्रवार को हड़ताल के दौरान कोलकाता में स्‍टैंड पर लाइन से खाली खड़ी पब्‍लिक ट्रांसपोर्ट बसें।)
रेलवे की हड़ताल  
1899 में ग्रेट इंडियन पेनिन्सुलर रेलवे की पहली हड़ताल की गई। इस हड़ताल को जमकर समर्थन मिला। तिलक ने अपने समाचार-पत्रों मराठा और केसरी की ओर से  हड़ताल का पूरी तरह से समर्थन किया। यही वह समय था, जब देश के कई प्रख्यात राष्ट्रवादी नेताओं बिपिनचंद्र पाल और जी सुब्रहमण्यम अय्यर ने भारतीय श्रमिकों की हालत में सुधार और उनके लिए कानून बनाने की मांग की। स्वदेशी आंदोलन के दौरान श्रमिकों ने बढ़चढ़ कर राजनीतिक गतिविधियों में भागेदारी निभायी। अश्विनी कुमार बनर्जी, प्रभात कुमार राय चौधरी, प्रेमतोष बोस एवं अपूर्व कुमार घोष ने कई बड़ी हड़तालें की। इन्‍होंने सरकारी मुद्रणालय, रेलवे और जूट उद्योग में हड़तालें की। यही वह समय था जब श्रमिक और व्यापार संघों की स्थापना की कोशिश भी की गई। इसके बावजूद उन्हें ज्‍यादा सफलता नहीं मिली। सुब्रह्मण्यम अय्यर एवं चिदम्बरम पिल्लई के नेतृत्व में तूतीकोरिन एवं तिरुनेलबेल्लि में हड़तालों का आयोजन किया गया। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया।


कब हुई भारत में पहली हड़ताल
(फोटो कैप्‍शन - भुवनेश्‍वर में हड़ताल के बावजूद सड़क पर ऑटो चलाते ड्राइवर को डंडे से डरा कर रोकता एक समर्थक।)
सबसे बड़ी तत्‍कालीन हड़ताल
इसके बाद तत्कालीन सबसे बड़ी हड़ताल की गई। ये वह समय था, जब बाल गंगाधर तिलक को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया। प्रथम विश्व युद्ध के दिनों गांधीजी के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का जनाधार हुआ। उन्होंने श्रमिकों एवं किसानों को अपने आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। यह वह समय था जब श्रमिकों को व्यापार संघों में संगठित करने की जरूरत महसूस हुई। 31 अक्टूबर, 1920 को ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना की गई।


कब हुई भारत में पहली हड़ताल
(फोटो कैप्‍शन - अलग-अलग व्‍यापारिक संगठनों के कार्यकर्ता मुंबई में सरकार के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते हुए।)
शाही नौसेना में विद्रोह पर हड़ताल
1947 में श्रमिकों ने युद्ध के बाद राष्ट्रीय विप्लवों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 1945 में मुंबई और कलकत्ता के बंदरगाह मजदूरों ने इंडोनशिया भेजे जाने वाली रसद को जहाजों पर लादने से मना कर दिया। 1946 में शाही नौसेना में विद्रोह पर मजदूरों ने हड़तालें कीं। उपनिवेशी शासन के आखिरी साल में भी मजदूरों ने पोस्ट, रेलवे और  अन्य प्रतिष्ठानों में आयोजित हड़तालों में बढ़चढ़ कर भागेदारी निभाई।

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