अन्ना हजारे के सिर के करीब से गुजरी थी गोली
कानपुर। 1962 में जब इंडिया आैर चाइना युद्ध हुआ तो इस दौरान बड़ी संख्या में  सैनिक शहीद हो गए थे। भारत सरकार ने युवाआें से सेना में शामिल होने की अपील की थी। एेसे में देशभक्ति के जज्बे से भरे अन्ना हजारे ने 1963 में भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला लिया।ज्वाइन अन्ना हजारे वेबसाइट के मुताबिक 1965 में, पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया और उस समय, हजारे को खेमकरण सीमा पर तैनाती मिली थी।यहां पाक के हमले में अन्ना के सभी साथी शहीद हो गए थे आैर एक गोली अन्ना के सिर के पास से गुजर गर्इ थी।अन्ना खुद इसे अपने जीवन का एक बड़ा मोड़ मानते हैं। उन्हेें सिक्किम, भूटान, जम्मू-कश्मीर, असम, मिजोरम, लेह आैर लद्दाख जैसे इलाकों में तैनाती मिली थी। अन्ना ने 26 वर्ष की आयु में उन्होंने लोगों की सेवा करने का निश्चय किया था।करीब 15 साल की देश सेवा के बाद वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर अपने मूल स्थान रालेगण सिद्धि आ गए।

भ्रष्‍टाचार से लड़ रहे अन्ना हजारे ने 53 साल पहले लड़ी थी जंग जिसमें हारा पाकिस्‍तान

समाज सेवा में भी अन्ना की रही खास भूमिका
इसके बाद अन्ना ने समाज सेवा के लिए अपने कदम बढ़ाए। अन्ना हजारे गांवों को बेहतर दिशा देने, बच्चों की शिक्षित बनाने के साथ गांवों वालो जल संचयन के लिए जागरूक किया। अन्ना की यही कोशिश रही कि हर शख्स आत्मनिर्भर बने।यह सब करते हुए अन्ना को महसूस हुआ कि देश को अगर मजबूत बनाना है तो सबसे पहले यहां पर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना होगा।अन्ना ने 1991 में भट्टाचार विरोधी जन आंदोलन की शुरुआत की। इस दौरान अन्ना हजारे को कर्इ बड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। इसके बाद 1997 अन्ना हजारे आमरण अनशन पर बैठ गए। 2006 में अन्ना ने 11 दिन तक आमरण अनशन किया था। अन्ना के इस अनशन को देश भर में बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिला था। इसके बाद अन्ना ने साल 2011 में जन लोकपाल विधेयक के निर्माण के लिए  जंतर-मंतर पर अनशन किया था। इसमें देश की आम जनता के साथ कड़ी बड़ी हस्तियां शामिल हुर्इ थीं।

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अन्ना के आंदोलन ने दिए ये चार बड़े राजनेता
अन्ना हजारे तो आज भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे लेकिन उनके  2011 वाले इस आंदोलन ने चार बड़े राजनेताआें को जन्म दिया है।अन्ना हजारे के इस आंदोलन में अरविंद केजरीवाल,  भारत की पहली महिला आर्इपीएस किरण बेदी,  जनरल वीके सिंह आैर मनीष सिसोदिया जैसे लोग मुख्य रूप से शामिल हुए थे। इस आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के नाम से एक राजनैतिक दल बना लिया था। इसके चलते ही अरविंद केजरीवाल आज दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे हैं। वहीं मनीष सिसाेदिया दिल्ली के उप मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हैं। भारत की पहली महिला आर्इपीएस अधिकारी किरण बेदी पुडुचेरी की उप राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसके अलावा वीके सिंह वर्तमान में विदेश राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अन्ना ने सोशल मीडिया पर भी लोगों को जोड़ने के लिए हमार लक्ष्य भ्रष्टाचार मुक्त हो भारत नाम से पेज बना रखा है।

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भारतीय विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए 2021 से पीएचडी अनिवार्य

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