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KANPUR: हर बड़ी कंपनी का एक सीएसआर बजट होता है, जिसे उन्हें सोशल वेलफेयर पर खर्च करना होता है। कंपनीज सीएसआर के लिए एनजीओ की हेल्प लेती हैं, लेकिन उन्हें ये पता नहीं होता है कि उनका पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ है। सोनल चोपड़ा ने उनकी इसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए ब्रिज इंपैक्ट की शुरुआत की। ब्रिज इंपैक्ट टेक्नोलॉजी एनजीओ को ट्रांसपेरेंट बनाने में हेल्प करती है ताकि ये जानकारी रहे कि पैसा कहां और कैसे खर्च किया जा रहा है।

ऐसे करता है काम

ब्रिज इंपैक्ट सीएसआर प्रबंधन, निगरानी और रिपोर्टिंग से जुड़े तमाम मसलों को टेक्नोलॉजी बेस्ड तरीके से एग्जिक्यूट करता है। इन्होंने इसके लिए एक वेब और मोबाइल इंटरफेस बनाया है, जो सभी कॉर्पोरेट्स को उन सीएसआर परियोजनाओं पर नजर रखने में हेल्प करता है, जिनमें उन्होंने अपना योगदान दिया है।

कठिन होता है पहला स्टेप

सोनल के मुताबिक, किसी भी कंज्यूमर को मनाने का फस्र्ट स्टेप काफी कठिन होता है लेकिन एक बार पोर्टफोलियो तैयार होने और एनजीओ को डोनर मिल जाने के बाद किसी भी प्रोग्राम में शामिल सभी प्रमुख भागीदारों और एनजीओ के लिए यह फायदे की स्थिति होती है।

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ऐसे आया आइडिया...
सोनल ने इस सफर को सिर्फ 16 साल की उम्र में तब शुरू किया, जब उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी लीडरशिप समिट और वाशिंगटन डीसी के प्रेसिडेंशियल क्लासरूम में पार्टिसिपेट किया। वहां से सोनल सोसाइटी में चेंज लाने के थॉट्स के साथ लौटकर आईं। जब उन्होंने कुछ एनजीओ का दौरा किया तो उनका ध्यान इस ओर गया कि डेवलेपमेंट से जुड़े इस फील्ड में कई खामियां हैं। इन खामियों को टेक्नोलॉजी से दूर किया जा सकता है। इसी सोच से लंदन के किंग्स कॉलेज से बिजनेस-इकोनॉमिक्स स्ट्रैटिजी में ग्रेजुएट सोनल ने मार्च 2017 में ब्रिज इंपैक्ट की शुरुआत की।

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