युवा ले रहे हैं कथा वाचक बनने की ट्रेनिंग, प्रयोगात्मक परीक्षा की तरह कर रहे तैयारी

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PRAYAGRAJ: आस्था और विश्वास की नगरी कुंभ में पुण्य की तलाश कर रहे लोगों के बीच तमाम युवा कॅरियर बनाने के लिए कसरत कर रहे हैं. इनकी चाहत आईएएस, पीसीएस या इंजीनियर और डॉक्टर बनने की नहीं है. वह सरकारी नौकरी भी नहीं चाहते. इनका लक्ष्य सिर्फ एक कुशल कथावाचक बनना है. वह चाहे श्रीमद्भागवत हो या फिर प्रभु श्री राम की कथा. कथावाचकों से दैनिक जागरण आईनेक्स्ट जानने की कोशिश की कि यही फील्ड ही क्यों?

महात्माओं के कैंप में कह रहे कथा
पांटूनपुल नंबर 14 के पास श्रीपीठम चैरिटेबल ट्रस्ट के महंत जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्री रघुनाथ जी महाराज का कैंप लगा है. कैंप के अंदर खूबरसूरत गद्दी पर युवा कथावाचक आचार्य इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज आसीन थे. इनके द्वारा यहां श्रीमद्भागवत की कथा का वर्णन किया जा रहा था. रिपोर्टर ने इनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इशारा करते हुए 30 वर्षीय शास्त्री अभिषेक शर्मा को जानकारी देने के लिए निर्देशित किया. अभिषेक ने बताया कि महाराज का निवास वृंदावन में हैं. उन्हीं के साथ वे हमेशा रहते हैं.

कथा वाचक बनने की दे रहे सलाह
बताया कि इंद्रेश उपाध्याय जी महाराज तीन साल से कथा वाचन कर रहे हैं. धर्म और संस्कृित की रक्षा के लिए कथावाचन के क्षेत्र में युवाओं का आना जरूरी है. हमारे ग्रंथों से बढ़ कर कोई शोध नहीं है. आज ग्रंथों में लिखी गई बातों पर ही शोध किए जा रहे हैं. हमारी देववाणी संस्कृत के विस्तान की गति धीमी पड़ गई है. कथावाचन के क्षेत्र में भी एक बेहतर कॅरियर है. युवाओं को यह बात समझनी चाहिए. सिर्फ अंग्रेजी पढ़ कर नौकरी पा लेना ही जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए.

कथावॉचन में हैं असीम संभावनाएं
श्री-श्री 108 स्वामी राम तीर्थ दण्डी बाड़ा में राम कथा का वाचन कर रहे करीब 35 वर्षीय स्वामी दुर्गेश जी महराज से भी इस क्षेत्र को चुनने की वजह इस क्षेत्र में मौजूद असीमित संभावनाएं बताते हैं. उनका कहना है कि कथावाचन आसान काम नहीं है. इसके लिए एक प्रयोगात्मक परीक्षा से भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. कॅरियर भी इस फील्ड में भी बेहतर है शर्त बस इतनी है कि लगन और मेहनत करने का जज्बा होना चाहिये.