मुंबई (ब्‍यूरो)। अभिनेता कुणाल कपूर के लिए खाली बैठकर अच्छे रोल का इंतजार करना मुश्किल है। वह उस समय में खुद को और बेहतर बनाते हैं। वह कहते हैं, 'मुझे लगता है कि पिछले कुछ साल मेरे लिए बहुत अच्छे रहे हैं। मुझे तिमांग्शु धूलिया, जयाराज, गौरी शिंदे और रीमा कागती जैसे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं जल्द ही कई फिल्में शुरू करने जा रहा हूं।' 
बैठकर अवसर का नहीं करते इंतजार 
उन्होंने कहा, 'मैं उस तरह का इंसान नहीं हूं, जो बैठकर अवसरों का इंतजार करे। मेरा मानना है कि अगर आप कुछ चाहते हैं और वह आपको नहीं मिल रहा है तो आप खुद वहां जाइए और उसे पा लीजिए।' कुणाल ने वर्ष 2004 में 'मीनाक्षी : द टेल ऑफ थ्री सिटीज' से डेब्यू किया था। इसके साथ ही उन्होंने 'रंग दे बसंती', 'लव शव ते चिकन खुराना', 'कौन कितने पानी में', 'डियर जिंदगी' जैसी फिल्में भी कीं। 
लिखने के शौकीन हैं कुणाल 
अभिनय के अलावा कुणाल को लिखना भी पसंद है। वह कहते हैं, 'मैं इन सबको काफी एंज्वॉय करता हूं। मुझे एक्टिंग पसंद है। इस क्षेत्र में आने से पहले मैंने कई प्रोफेशन के बारे में सोचा, लेकिन यह समझ नहीं पा रहा था कि मुझे क्या पसंद है। जब मैं कैमरे के सामने आया, तब सोच लिया कि मुझे बाकी की जिंदगी यही करना है। वहीं जब मैं 10 या 11 साल का था, तब से लिख रहा हूं। यह कला मुझमें शुरू से है।'            

मुंबई (ब्‍यूरो)। अभिनेता कुणाल कपूर के लिए खाली बैठकर अच्छे रोल का इंतजार करना मुश्किल है। वह उस समय में खुद को और बेहतर बनाते हैं। वह कहते हैं, 'मुझे लगता है कि पिछले कुछ साल मेरे लिए बहुत अच्छे रहे हैं। मुझे तिमांग्शु धूलिया, जयाराज, गौरी शिंदे और रीमा कागती जैसे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला है और मैं जल्द ही कई फिल्में शुरू करने जा रहा हूं।' 

बैठकर अवसर का नहीं करते इंतजार 

उन्होंने कहा, 'मैं उस तरह का इंसान नहीं हूं, जो बैठकर अवसरों का इंतजार करे। मेरा मानना है कि अगर आप कुछ चाहते हैं और वह आपको नहीं मिल रहा है तो आप खुद वहां जाइए और उसे पा लीजिए।' कुणाल ने वर्ष 2004 में 'मीनाक्षी : द टेल ऑफ थ्री सिटीज' से डेब्यू किया था। इसके साथ ही उन्होंने 'रंग दे बसंती', 'लव शव ते चिकन खुराना', 'कौन कितने पानी में', 'डियर जिंदगी' जैसी फिल्में भी कीं। 

लिखने के शौकीन हैं कुणाल 

अभिनय के अलावा कुणाल को लिखना भी पसंद है। वह कहते हैं, 'मैं इन सबको काफी एंज्वॉय करता हूं। मुझे एक्टिंग पसंद है। इस क्षेत्र में आने से पहले मैंने कई प्रोफेशन के बारे में सोचा, लेकिन यह समझ नहीं पा रहा था कि मुझे क्या पसंद है। जब मैं कैमरे के सामने आया, तब सोच लिया कि मुझे बाकी की जिंदगी यही करना है। वहीं जब मैं 10 या 11 साल का था, तब से लिख रहा हूं। यह कला मुझमें शुरू से है।'           

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