- दैनिक जागरण आई नेक्स्ट कार्यालय में आयोजित किया गया पैनल डिस्कशन

- शहर के गणमान्य नागरिकों ने मूल सुविधाओं को लेकर रखे विचार

Meerut . इस साल 72वें स्वतंत्रा दिवस पर दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने अपनी आजादी को उन सुविधाओं से जोड़कर देखा जिन्हें पाना हमारा अधिकार है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही के चलते वो सुविधाएं आज भी हमसे दूर हैं. इस समस्या को डीजे-आई नेक्स्ट ने एक बेहतरीन सीरीज के रुप में प्रकाशित किया और आम जन तक उन समस्याओं के कारण को पहुंचाया. इस संबंध में शुक्रवार को पैनल डिस्कशन का आयोजन कर शहर के गणमान्य और अपने क्षेत्र के एक्सपर्ट लोगों से इन समस्याओं के निदान पर चर्चा कर समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया.

आज सरकारी विभागों में फैली रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार मूल समस्या है इससे आजादी के लिए जरुरी है कि हम पहले खुद में ही बदलाव लाएं. सरकारी विभागों में ब्रोकरों के बिना आज कोई काम नही होता, हम खुद अपने काम के लिए ब्रोकर या रिश्वत का सहारा लेते हैं. भ्रष्टाचार से निजात की शुरुआत हमें अपने आप से करनी होगी.

आशीष त्यागी, आईटी कंसलटेंट

आरक्षण का लाभ उन लोगों को मिल रहा है जिनको इसकी जरुरत भी नही है गरीबी के आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए. कूडे़ के निस्तारण का हमें खुद भी विकल्प ढूंढना चाहिए. हम पार्क में गड्ढा कर अपने पार्क के लिए खाद बना सकते हैं.

नेहा कक्कड़, प्रोग्राम प्रजेंटर, ऑल इंडिया रेडियो

आज स्कूल केवल किताब पढ़ाई तक सीमित हैं स्कूलों की शिक्षा प्रणाली में किताबों के साथ साथ स्किल डेवलपमेंट, लेटेस्ट टेक्नोलोजी आदि की बच्चों को जानकारी देनी चाहिए. डेयरी फार्मिग , एग्रीकल्चचर फार्मिंग ऐसे कई विकल्प हैं जो आज गांव देहात के बच्चे सीख कर अपना बेहतरीन भविष्य बना सकते हैं.

योगिता नौसरण, आर्किटेक्ट

सरकारी योजनाओं को सफल बनाने में पैसा तो बहुत खर्च किया जा रहा है लेकिन उनका उददेश्य सफल नही हो रहा है. प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा केवल मिड डे मील के लाभ तक सीमित है. बच्चे स्कूल आ रहे हैं तो पढ़ने के लिए नही मिड डे मील खाने के लिए आ रहे हैं. जिन योजनाओं का आउटपुट नही आ रहा है उन्हें बंद कर देना चाहिए.

डॉ. सरिता त्यागी

रिश्वत देना हमारी मानसिकता बन चुकी है इसलिए हमें भ्रष्टाचार से आजादी नही मिल रही है. सरकारी विभागों में बिना रिश्वत के काम नही होता यह सोचकर हम भी इसका हिस्सा बन चुके हैं. स्किल डेवलेपमेंट या कहें कि हाथ के मैकेनिक धीरे-धीरे खत्म हो रहे है जबकि आज भी हैंड मिस्त्री के पास रोजगार की भरमार है.

देवेंद्र मित्तल, महिला सशक्तिकरण वेलफेयर सोसाइटी

सरकारी योजनाएं और शासन के नियम सभी में समयानुसार कुछ ना कुछ बदलाव किया जाना चाहिए. प्रदूषण कम करने के लिए पौधों को गोद लेकर उनका संरक्षण किया जाना चाहिए. ई रिक्शा चालकों के लाइसेंस और उनका आयु वर्ग निर्धारित होना चाहिए. ताकि दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सके.

अर्पित भारद्वाज

समस्याओं को दूर करने के लिए जरुरी है उसके मूल कारण को जानना. इसके लिए अच्छे काम करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए, बच्चों को सही चीजें करने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा. वेस्टेज को सरकार को खरीदना चाहिए.

दुर्गेश स्वामी, मोटिवेशनल स्पीकर

आज गली मोहल्लों में स्कूल कालेज अस्पताल खुले हुए हैं. इंजीनियर, टीचर इन कॉलेजों से निकल रहे हैं लेकिन सरकार उस एवरेज में रोजगार नही दे पा रही है जरुरी है कि पॉलिसी मेकिंग में बदलाव हो. केवल पॉलिसी लागू करना सुधार नही है उस पॉलिसी का सही लाभ मिले तब फायदा है.

सचिन शर्मा, हेल्थ कंसलटेंट

समाज में सुधार के लिए सभी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. फिर चाहे समस्या गंदगी की हो या भ्रष्टाचार की तभी सुधार होगा.

किशन सूद, स्टूडेंट

सरकारी योजनाओं को लागू करना ही काफी नही है उनका सही तरह से प्रयोग और सही स्तर पर लाभ मिलना भी जरुरी है.

सौरभ गर्ग, समाज सेवी

जिस दिन हम हमारी खुद की जिम्मेदारी पहचान कर गलत काम और गलत चीज को देखकर विरोध करेंगे अपने आप सुधार होना शुरु हो जाएगा.

आदि कवि, मोटिवेशनल स्पीकर