-देशभर के 64 बीमार सरकारी उपक्रमों को बंद करने की हो रही तैयारी

-उपक्रमों से मिली जमीन पर पीएम आवास योजना के तहत मकान बनाने का विचार

----------------

जागरण संवाददाता, कानपुर : कभी जिस लाल इमली के हूटर पर शहर दौड़ता था, अब वह इतिहास होने की कगार पर है. मिल चालू करने के लिए हुए आंदोलन पर मिले आश्वासन और घाटे के नाम पर बंद करने की रिपोर्ट के बीच कैबिनेट के एक नोट ने धड़कनें बढ़ा दी हैं. इस कैबिनेट नोट के अनुसार, बीआइसी की लाल इमली और पंजाब स्थित धारीवाल समेत देशभर के 64 बीमार उपक्रमों को बंद करने पर कैबिनेट ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है. हालांकि, इसके साथ शर्त रखी गई है कि हर उपक्रम के लिए अलग अलग प्रस्ताव तैयार होगा.

डीपीआर तैयार करने के निर्देश

उपक्रम बंद करने से लेकर भू-प्रयोग तक के बारे में अलग अलग बिंदुओं पर डिटेल रिपोर्ट तैयार कर हर उपक्रम के प्रस्ताव पर कैबिनेट से अलग-अलग मंजूरी लेनी होगी. उपक्रमों से मिली जमीन पर पीएम आवास बनाए जाने का विचार है.

ब्रिटिश इंडिया कार्पोरेशन की इकाइयां कानपुर स्थित लाल इमली और पंजाब की धारीवाल मिलें लंबे समय से बंद चल रही हैं. 60 नंबर लोई और गर्म कंबल के लिए विश्व प्रसिद्ध लाल इमली 1992 से घाटे में चल रही है. 2008 में उत्पादन न्यूनतम और 2012 से उत्पादन पूरी तरह से बंद है. बीच-बीच में लाल इमली को दोबारा चालू करने के प्रयास की खबरें आती रहीं और मंत्रियों से मिल खोले रखने के आश्वासन मिलते रहे लेकिन, केंद्र सरकार के मौजूदा फैसले के बाद सारी संभावनाएं समाप्त दिखाई दे रही हैं.

रिवाइज्ड गाइड लाइन का अनुमोदन

कैबिनेट मीटिंग में बंदी और परिसंपत्तियों के निस्तारण के लिए रिवाइज्ड गाइड लाइन का अनुमोदन भी कर दिया गया है. नई गाइड लाइन सितंबर 2016 को जारी डीपीई (डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज) नियम को रिप्लेस करेगी. इसमें इकाइयों को समयबद्ध व चरणबद्ध बंद करने की प्रक्रिया, मंत्रालयों की जिम्मेदारियों का बंटवारा, कर्मचारियों के देयक भुगतान का उत्तरदायित्व आदि का निर्धारण किया गया है. कैबिनेट के मुताबिक कर्मचारियों को 2007 के वेतनमान के हिसाब से वीआरएस मिलेगा. गाइड लाइन की प्रथम प्राथमिकता जमीन के उपयोग को लेकर है. बंद हो रही इकाइयों की जमीन का उपयोग अफोर्डेबिल हाउसिंग स्कीम के लिए किए जाने का प्रस्ताव है. यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाए जाएंगे.

------------------