- राज्य के विकासखंडों में 70 लाख पौधे किए गए रवाना

- कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने पौधों से भरे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

>DEHRADUN: सगंध पादप लेमनग्रास की कलस्टर आधारित खेती के साथ आमदनी बढ़ाने को लेकर सूबे के तमाम विकासखंडों में 70 लाख लेमनग्रास के पौधे रवाना किए गए. कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने इन पौधे से भरे हुए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. तमाम जिलों से पहुंचे कास्तकारों को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि लेमनग्रास के साथ ही भेड़, बकरी, गाय, मत्स्य, कुकुट व मधुमक्खी पालन पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

1008 गावों में हो रहा पलायन

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के कुल 1008 गावों में पलायन हो गया है. पलायन रोकने के लिए भी सघन खेती अपनाये जाने की बेहद जरूरत है. इस खेती से जहां कास्तकार की आर्थिकी स्थिति मजबूत होगी, वहीं किसान का स्वाभिमान भी बढे़गा. बताया राज्य में 1000 हेक्टेयर बंजर भूमि पर सघन खेती की जा रही है. कृषि मंत्री ने आई एम ए विलेज की अवधारणा का जिक्त्र करते हुए कहा कि इससे गांव का खेती के रूप में मॉडल विकास हो सकेगा. इसके लिए 15 लाख रुपए का रिवाल्विंग फंड उपलब्ध कराया जायेगा. 20 हेक्टेयर क्षेत्र में कलस्टर आधारित खेती के साथ ही घेरबाड़, तारबाड़, सुरक्षा दीवार आदि का निर्माण किया जायेगा. सरकार हर ब्लॉक में एक मॉडल गांव का चयन कर सगंध पादप खेती को बढावा देगी. सगंध पौधा केन्द्र सेलाकुई के डायरेक्टर जेएस चौहान ने बंजर भूमि को आबाद करने में लेमनग्रास की भूमिका की जानकारी दी. इस मौके पर हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, टिहरी समेत कई अन्य जनपदों के कास्तकारों ने लेमनग्रास की खेती के संबंध में अपनाई जाने वाली विधि के बारें में जानकारी हासिल की.