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- संडे को हुए हंगामे को देखते हुए प्रशासन ने पुरानी दुकानों से हटवाया कब्जा: सूत्र

- शराब की पुरानी दुकानें पुराने ठेकेदारों ने कर दी खाली, शिफ्ट होने लगे नए ठेकेदार

BAREILLY:

शराब की दुकानों के खाली न होने से बरेली में जगह-जगह होने वाले प्रदर्शन से शहरवासियों समेत प्रशासन को राहत मिली है. संडे को सुभाषनगर और इज्जतनगर में नई जगह शराब की दुकान खोलने पर निवासियों ने जमकर धरना प्रदर्शन किया था. जिसके बाद प्रशासन ने आबकारी से पूर्व में वेरीफाई हुई पुरानी दुकानों को खाली करवाकर आवंटित कराने के निर्देश दिए थे. संडे को दिन भर शराब की दुकानों की अघोषित बंदी रही. देर रात पुराने ठेकेदारों ने दुकान खाली कर दी. साथ ही, सुबह नए सिरे से जिन नए ठेकेदारों को दुकानें अलॉट की गई थी वह वहां काबिज हो गए. हालांकि, इसके बदले उन्हें मोटा किराया देना पड़ा है.

3 गुना देना पड़ा किराया

देसी, बीयर, मॉडल और अंग्रेजी शराब की फुटकर दुकानों पर 31 अप्रैल तक पुराने ठेकेदार काबिज रहे. जबकि 1 अप्रैल को नए ठेकेदारों को अपनी दुकानों की शुरुआत करनी थी. लेकिन उन्होंने पुरानी दुकानों के मालिकों से बात की तो मालिकों ने पहले तो साफ इनकार कर दिया. ऐसे में ठेकेदारों ने नई दुकान खोजनी शुरू की, लेकिन इसमें आबकारी विभाग से वैरीफिकेशन कराना अनिवार्य था. ओके रिपोर्ट पर ही दुकान खोलनी थी. इसमें लंबा समय लगना तय था. संडे को जब दुकानें खाली हुई तो दुकानों के मालिकों ने मनमाना किराया मांगा. सूत्रों के मुताबिक करीब 3 गुना अधिक किराया मांगा. मजबूरी में उन्हें तीन गुना तक किराया देना पड़ा है.

अभी आधी दुकानें शिफ्ट नहीं

31 मार्च और 1 अप्रैल दो दिनों तक दुकानों पर काबिज न होने की वजह से अभी शराब की दुकानों के हिसाब से सिर्फ 50 परसेंट लोगों ने ही कोटा उठाया है. हालांकि, इससे आबकारी विभाग के राजस्व पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन शराब की दुकानों के नए ठेकेदारों को इससे प्रभावित होना तय है. क्योंकि 1 दुकान पर चाहे वह देसी हो गया विदेशी करीब 50 हजार बोतल की बिक्री का कोटा मिला है. दो दिन बिक्री नहीं हुई और आगामी दो से तीन दिनों तक सभी दुकानों के खुलने की भी संभावना नहीं है. ऐसे में करीब हफ्ते भर तक बिक्री न होने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा. हालांकि, इससे पुराने ठेकेदारों को कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.

सिंडीकेट के कब्जे में दुकान

सूत्रों के मुताबिक शराब की दुकान पर ई-लॉटरी न मिलने के बाद पुराने ठेकेदारों ने नए ठेकेदारों के साथ सौदा तय किया है. जिसमें आवेदन से लेकर अन्य दौड़ भाग समेत अन्य सभी खर्चो को जोड़कर उसका करीब दो गुना तक नए ठेकेदारों ने पुराने ठेकेदारों को दे रहे हैं. साथ ही, इसके बदले दुकान पर नए ठेकेदारों का ही नाम बरकरार रखने की शर्त रखी है. ऐसे में देसी, बियर, अंग्रेजी और मॉडल हर जगह सिंडीकेट प्रणाली का संचालन अबकी बार देखने को मिल रहा है. पुराने ठेकेदारों के गुर्गे नए ठेकेदारों की लोकेशन ट्रेस कर उन्हें गुट में शामिल करने की पुरजोर कोशिश भी कर रहे हैं. कुछ लोग जिन्होंने उत्साह में आवेदन किया वह इसमें शामिल भी हो चुके हैं.

पुरानी दुकानों पर ही करीब 50 परसेंट लाइसेंस धारकों ने दुकानें खोल चुके हैं. नई दुकान खोजना या पुरानी पर काबिज होना इसका आबकारी विभाग से कोई लेना देना नहीं है. दुकान नहीं खुलना, कोटा नहीं उठना, पूरी बिक्री न होना इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की है.

शिव हरि मिश्र, उपायुक्त, आबकारी विभाग