नये कीर्तिमान बनाने के लिए जानी जाती हैं तूलिका

सभी महिलाओं को ऊचाई पर देखना है लक्ष्य

कर चुकी हैं 22 पर्वतारोहण एंव ट्रैकिंग अभियान

Meerut. दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक स्क्वाड्रन लीडर तूलिका रानी सामान्यता पुरुष प्रधान रहे क्षेत्रों में नये कीर्तिमान बनाने के लिए जानी जाती हैं. अभी तक भारत, नेपाल, भूटान, अफ्रीका, रूस और ईरान सहित 22 पर्वतारोहण एंव ट्रैकिंग अभियान कर चुकी हैं. तूलिका की दृष्टि सदैव नवीन चुनौतीपूर्ण पहाड़ों पर केंद्रित होती है. तूलिका 2012 में दुनिया की सर्वाेच्च चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली यूपी की प्रथम महिला हैं, वहीं ईरान में स्थित एशिया के सर्वाेच्च ज्वालामुखी दामावंद पर 2015 में चढ़ाई करने वाली प्रथम भारतीय महिला एंव नेपाल में अन्नपूर्णा बेस कैंप पर सर्दियों में बिना गाइड के 2016 में पहुचने वाली प्रथम भारतीय हैं. साथ ही हिमाचल प्रदेश में 2014 में बेनाम वर्जिन चोटी पर चढने वाली विश्व की पहली टीम लीडर रहीं.

वायु सेना में कार्यरत रही

तूलिका ने दस साल तक भारतीय वायु सेना में एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ऑफिसर की भूमिका भी निभाई है. वही हैदराबाद स्थित वायु सेना अकादमी में आउटडोर ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर का महत्वपूर्ण पदभार संभालते हुए भावी वायु सेना अधिकारियों को सैन्य प्रशिक्षण दिया. तूलिका रिवर राफ्टिंग, पैरासेलिंग व माउंट ट्रेल की प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग करती रही है.

प्रासंगिक चुनौतियां

तूलिका समाज की प्रासंगिक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है. वही विद्यार्थियों, युवाओं व खासतौर से महिलाओं को प्रोत्साहित करने व उनका मार्गदर्शन करने को अपनी जिम्मेदारी समझती हैं. वे देश के विभिन्न भागों में अपनी बातों के द्वारा युवाओं तक पहुंचने का प्रयत्न करती रहती हैं, वहीं कई राज्यों के स्कूलों में अपनी बातों से छात्रों को प्रोत्साहित करतीहती हैं.

निर्धारित किए लक्ष्य

तूलिका ने 2018 में अर्जेटीना स्थित साउथ अमेरिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउण्ट एकॉन्कागुआ तथा दुनिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखी ओजस डेल सलाडो को अपना लक्ष्य बनाया है. महिला अधिकारियों व समानता की दृढ़ पैरोकार तूलिका इन ऊचाइयों को हासिल कर महिला शक्ति व क्षमताओं के नये मापदंड तय करना चाहती है.