नहीं है कोई निश्‍चित सूत्र
हालांकि विवाह को सर्वोत्‍तम मुहूर्त पर करने पर ही जोर दिया जाता है और उसकी पूरी तरह छानबीन के पश्‍चात ही विवाह का समय और तिथि पर फैसला लिया जाता है। इसके बावजूद इसे ज्ञात करने के लिये कोई निश्‍चित सूत्र नहीं है। हिन्दु धर्म के पंडितों और ज्‍योतिषियों में भी विवाह की तिथियों का चयन करते समय देखे जाने वाले तथ्‍यों और आधारों पर भिन्‍न मत हैं। इसलिए कई बातों जैसे वर वधु की कुंडली, ग्रह नक्ष्‍त्रों की गतिविधि और काल को ध्‍यान रख कर विवाह का शुभ मुहूर्त तय किया जाता है। विवाह की तिथि तय करने के लिये अन्‍य चीजों के साथ व्यवहारिकता का ध्‍यान रखना भी होना भी आवश्यक है। इन सारे तथ्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए पंडितों ने वर्ष 2018 के कुछ उत्‍तम विवाह मुहूर्त निश्‍चित किए हैं जो इस प्रकार हैं।


माह वार शुभ विवाह मुहूर्त
फरवरी:  24
मार्च: 1- 5- 6 -8 -10 -12
अप्रैल: 18- 19- 20- 24- 25- 27- 28-29- 30
मई: 1- 4- 6-11- 12
जून: 18- 21- 23- 25- 27- 28
जुलाई: 5- 10-11


इसके बाद देव प्रबोधनी एकादशी के पश्‍चात करीब करीब चार माह तक देवताओं के विश्राम की अवधि आयेगी जिसके चलते शुभ कार्य रुके रहेंगे। इसीलिए अगस्‍त, सितंबर, अक्‍टूबर में विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं होंगे। दीपावली उत्‍सव के माह नवंबर में पुन शादियों का मौसम आयेगा और देव उठावनी एकादशी सहित लगभग 11 मुहूर्त नवंबर में और उसके अगले माह दिसंबर में 6 विवाह मुहूर्त आयेंगे। ये मुहूर्त इस प्रकार हैं।

नवंबर दिसंबर के विवाह मुहूर्त
नवंबर: 11- 12- 13- 14- 19- 23- 24- 25- 28- 29- 30
दिसंबर: 1- 3- 4- 9- 10- 11

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