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LUCKNOW : लोकसभा चुनाव परवान चढऩे के साथ ही तमाम नेताओं की जुबान भी बेकाबू होती जा रही है। सूबे के चार प्रमुख नेताओं पर चुनाव आयोग द्वारा प्रचार पर पाबंदी लगाए जाने के बावजूद नेताओं की बदजुबानी का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। नेताओं के अलावा उनके समर्थक भी चुनावी माहौल को बिगाडऩे में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे। हैरत की बात यह है कि अपने आपत्तिजनक बयानों के बाद भी तमाम ऐसे नेता आयोग की नजरों से बचने में भी कामयाब हो गये है।

बड़े नेता भी पीछे नहीं
चुनाव में अपनी बदजुबानी से सुर्खियां बटोरने वालों में बड़े नेता भी पीछे नहीं है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी और उनके पति राबर्ट वाड्रा को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया और बाद में इसे कड़वा सच भी करार दे डाला। सपा सरकार में मंत्री मोहम्मद आजम खान के आपत्तिजनक बयानों के बाद जब चुनाव आयोग ने उनको नोटिस थमाया तो उनके विधायक पुत्र अब्दुल्ला आजम ने इस कार्रवाई की वजह मुसलमान होना करार दे दिया। सबसे बुरा हाल तो फतेहपुर सीकरी में गठबंधन प्रत्याशी भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित का रहा जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपशब्द बोलने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी राजबब्बर के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

शुरुआत से ही सक्रिय
चुनावी माहौल को बिगाडऩे के लिए तमाम नेता शुरुआत से ही सक्रिय हो गये थे। भाजपा ने रामपुर से जयाप्रदा को प्रत्याशी घोषित किया तो सपा नेता जावेद खान ने उनको लेकर आपत्तिजनक बयान दे डाला। इसे लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग ने जावेद खान को नोटिस भी भेजा था। इसी तरह भाजपा से बगावत करने वाले आईपी सिंह भी लगातार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग करते रहे पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी। गोंडा से गठबंधन प्रत्याशी पंडित सिंह ने एक जनप्रतिनिधि और पुलिस पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जिसके बाद उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया गया। वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी भी गठबंधन प्रत्याशी आजम खान को 'मोगैम्बो' कहने में फंस गए और उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा दर्ज हो गया।

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पिछले चुनाव में भी खूब हंगामा
पिछले लोकसभा चुनाव में भी नेताओं की बदजुबानी को लेकर खासा हंगामा बरपा था। खास बात यह है कि इनमें कई बड़े नेता भी शामिल थे जो चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने को आपत्तिजनक बयान देने से बाज नहीं आए। पिछले चुनाव में सपा सरकार में मंत्री रहे आजम खान के आपत्तिजनक बयानों के बाद चुनाव आयोग ने उनके प्रचार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। सपा के ही अबु आजमी ने बयान दिया था कि 'जो सपा को वोट नहीं देगा, वो सच्चा मुसलमान नहीं है'। ऐसा ही बयान वाराणसी से प्रत्याशी अरविंद केजरीवाल ने भी दिया था जिसके बाद आयोग ने उनको नोटिस थमा दिया था। योग गुरु बाबा रामदेव भी इसमें पीछे नहीं रहे और उन्होंने राहुल गांधी को लेकर बयान दिया था कि 'वे दलितों के घर पिकनिक मनाने जाते हैं'। वहीं तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी तो उमा भारती ने प्रियंका गांधी को लेकर गलतबयानी की थी।

इन पर लगा बैन
हालिया चुनाव में आयोग अब तक चार नेताओं पर प्रतिबंध लगा चुका है। इनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हैं जिन पर धार्मिक आधार पर वोट मांगने का प्रयास करने का आरोप है। ऐसे ही बयान की वजह से बसपा सुप्रीमो मायावती पर भी बैन लगाया गया है। इसके अलावा वोटों के लिए धमकाने के आरोप में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को भी बैन का सामना करना पड़ा तो भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी के बाद आजम खान के प्रचार पर भी प्रतिबंध लग गया।

इन पर लगा बैन
नेता               बैन की अवधि
योगी आदित्यनाथ     72 घंटे
आजम खान          72 घंटे
मायावती              48 घंटे
मेनका गांधी           48 घंटे