-आईटीआई में वन विभाग मुख्यालय ने दी जानकारी

देहरादून, राज्य में फॉरेस्ट फायर सीजन शुरू हो चुकी है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की ओर से हर साल जंगलों पर लगनी वाली आग के रोकथाम के दावे किए जाते हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और है। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार राज्य गठन से लेकर 2018 तक राज्य में 38,791 हेक्टेअर जंगल जलकर राख हो चुके हैं। इससे 18522 लाख रुपए का नुकसान हो चुका है। हल्द्वानी निवासी हेमंत गौनिया के द्वारा मांगी गई सूचना के अधिकार में कार्यालय प्रमुख वन संरक्षक उत्तराखंड से सूचनी दी गई है। आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार बताया गया राज्य के जंगलों में आग लगने की सबसे कम घटनाएं वर्ष 2011 में हुई। इस वर्ष 231.75 हेक्टेअर जंगल जले। वर्ष 2018 में सबसे ज्यादा 4480.06 हेक्टेअर जंगल जलकर खाक हुए।

फॉरेस्ट फायर पर एक नजर

ईयर--फॉरेस्ट प्रभावित एरिया--नुकसान

2000--925.00--2.99

2001--1393.00--1.17

2002--3231.00--5.19

2003--4983--10.12

2004--4859--13.14

2005--3652--10.82

2006--562.44--1.62

2006--1595.35--3.67

2008--2369.00--2.68

2009--4115.00--4.79

2010--1610.82--0.05

2011--231.75--0.30

2012--2826.30--3.03

2013--384.05--4.28

2014--930.33--4.39

2015--701.36--7.94

2016--4433.75--4.65

2017--1244.75--18.34

2018--4480.06--86.05

फायर सीजन से पहले की तैयारियां

-रोटेशनल एवं नियंत्रित फुकान।

-फायर लाइनों की सफाई।

-जिला एवं स्टेट लेवल फायर मैनेजमेंट योजना।

-अवेयरनेस प्रोग्राम।

-मास्टर कंट्रोल रूम।

-क्रू स्टेशन।

-वॉच टॉवर।

-वायरलैस संचार नेटवर्क

-सेटेलाइट आधारित सूचना प्रणाली।

-वन फायर रिपोर्ट मैनेजमेंट।

-मॉडर्न फायर फाइटिंग टूल्स।

फायर के दौरन मैनेजमेंट

-फायर की पहचान।

-क्रू स्टेशन व मोबाइल टीम से अग्निशमन की कार्रवाई।

-पब्लिक अवेयरनेस की कॉटिनिटी।

-फायर ड्रिल व कंट्रोल फुकान।

दो सालों में 15 के खिलाफ केस

साल-दर-साल राज्य के जंगलों में लगने वाली आग के खिलाफ डिपार्टमेंट ने सख्त रवैया अपनाया। विभाग ने वर्ष 2016 में 8, 2018 में सात को पकड़ कर उनके खिलाफ केस दर्ज किया।

इस वर्ष अब तक 23 घटनाएं

फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू हो चुका है। इस वर्ष अब तक 23 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अल्मोड़ा में तीन, बागेश्वर में एक, चमोली में दो, देहरादून में 5, हरिद्वार में 6, नैनीताल में एक, पौडी में दो, पिथौरागढ़ में दो और उत्तरकाशी में एक घटना सामने आ चुकी है। करीब 35.65 हेक्टेअर से अधिक के फॉरेस्ट व सिविल फॉरेस्ट जलकर स्वाहा हो चुका है।

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कंट्रोल रूम 18001804141 एक्टिव

आग की घटनाएं रोकने के लिए अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टियां रदृद कर दी गई हैं। प्रमुख वन संरक्षक के अनुासर 10 हजार अधिकारी व कर्मचारी मुस्तैद हैं। सूचनाएं देने के लिए कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिया गया है। जिसका नंबर 18001804141 फ्लैश किया गया है।