RANCHI: जमीन के नीचे वाटर लेवल मेंटेन करने के नाम पर सरकारी राशि की लूट मची है. वाटर लेवल मेन्टेन करने के लिए राज्य सरकार ने रोड के फुटपाथों पर पेबल ब्लॉक्स लगाने का निर्देश जारी किया है, लेकिन जिस क्वालिटी के पेबल ब्लॉक्स लगाने के निर्देश दिए गए हैं उनका पालन नहीं किया जा रहा है. नतीजन, शहर भर में लग चुके पेबल ब्लॉक्स टेढ़े-मेढ़े, टूटे और काले पड़ चुके हैं. इस मामले में लोगों का आरोप है कि पेबल के नाम पर लूट की जा रही है. जो पेबल लगाए जा रहे हैं वो अच्छी क्वालिटी के नहीं है. साथ ही उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. ठेकेदार के साथ विभाग की सांठगांठ है, जिस कारण तय मानकों से भी निम्न स्तर के माल को पास किया जा रहा है और उसे सड़क किनारे लगाया जा रहा है. यही कारण है कि इनकी मजबूती भी काफी कम है. साथ ही ये जल्दी खराब भी हो रहे हैं.

खास कंपनी पर अधिकारी मेहरबान

सरकारी विभाग के अधिकारी भी इस काम के लिए एक खास कंपनी पर ही मेहरबान हैं, जबकि कई मैनुफेक्चरर कंपनियां इस क्षेत्र में बेहतर काम कर रही हैं. अधिकारियों का ठेकेदारों पर दबाव रहता है कि तुपुदाना स्थित उस मैनुफेक्चरर कंपनी से ही माल खरीदें और लगाएं. उस माल की गुणवत्ता जांच पर भी ध्यान नहीं दिया जाता है.

एक रिटायर्ड अधिकारी का दमदार रसूख

उस कंपनी पर राज्य सरकार के एक रिटायर्ड उच्च अधिकारी के दमदार रसूख व संरक्षण की बात भी छनकर सामने आई है. इस अधिकारी के निर्देश पर ही कई विभागों के सचिव स्तर के अधिकारी भी उस कंपनी पर खासे मेहरबान हैं.

वाहनों का बोझ नहीं सह पा रहे पेबल ब्लॉक (बॉक्स)

इस मामले में विभागों को साफ निर्देश हैं कि सड़क किनारे लगने वाले 80 एमएम पेबल ब्लॉक का स्ट्रेंथ कम से कम 40 एम3 होनी चाहिए ताकि वो भारी वाहनों का बोझ भी वहन कर सकें. लेकिन स्ट्रेंथ कम रहने के कारण ब्लॉक काफी टूट रहे हैं. इसके अलावा इन्हें लगाने के पहले जमीन पर बालू बिछाना अनिवार्य होता है लेकिन बालू के स्थान पर स्टोन या क्रशर डस्ट का प्रयोग किया जा रहा है. स्ट्रेंथ की जांच भी ठेकेदार खुद करा ले रहा है और रिपोर्ट विभाग में जमा कर दे रहे हैं. ज्ञात हो कि निम्न स्तर के माल की कीमत सरकार द्वारा तय कीमत से काफी कम होती है, जिसका फायदा सीधे सरकारी विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों को हो रहा है.

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कैसे मेंटेन करता है वाटर लेवल

इन ब्लॉक के लगने से इनके बीच बने दरारों से बारिश का पानी जमीन के नीचे चला जाता है, जिससे वाटर लेवल मेन्टेन रखने में काफी सहायता होती है. इसके अलावा ये पेबल ब्लॉक्स सिमेंट से बने होते हैं जिसके कारण इनकी साफ-सफाई भी आसानी से की जा सकती है. राज्य सरकार ने सभी जिलों कोसाफ-सुथरा रखने के साथ-साथ पानी के लेवल को भी ध्यान में रखते हुए इन्हें लगाने का निर्देश दिया है.

वर्जन

शहर की कई सड़कों के किनारे पेबल ब्लॉक्स लगा दिए गए हैं. उन्हें देखिए उनमें ज्यादातर या तो टूट गए हैं या फिर टेढ़े-मेढ़े हो गए हैं. गढ्डा हो गया है, जहां पानी भर जाता है. सरकारी राशि की लूट की जा रही है और लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है.

-उपेन्द्र कुमार , हरमू रोड

नाली पर पहले लगा दिया फिर उसको तोड़ कर हटा दिया और नाली साफ करने लगा. सफाई के बाद फिर से लगा दिया. कोई लेवल नहीं है जहां मन वहां चिपका दिया जा रहा है. कोई काम तक देखने नहीं आता. मेरा तो यहीं दुकान है. दिनभर देखता रहता हूं इनलोगों का काला खेल.

प्रत्युष कुमार, दीपाटोली

वर्जन

जिन्हें भी काम अलॉट किया जाता है उनके साथ विभागीय एकरारनामा किया जाता है कि कौन सा मेटेरियल किस क्वालिटी का होगा. मेरी जानकारी में नहीं है कि इस तरह का गोरखधंधा चल रहा है यदि ऐसा है तो इसकी जांच कराए जाएगी. सबसे बेहतर और बेस्ट क्वालिटी के प्रोडक्ट ही इस्तेमाल किये जाने चाहिए. साथ ही उनका मूल्यांकन कर ही इस्टीमेट तैयार किया जाता है.

-रास बिहारी सिंह, मुख्य अभियंता,

पथ निर्माण विभाग