- लोहिया अस्पताल शुरू करेगा ट्रॉमा सर्विसेज

- अगले माह के अंत तक मरीजों के लिए शुरू हो सकती हैं सुविधाएं

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LUCKNOW :

शहरवासियों को जल्द ही तीसरे ट्रॉमा सेंटर की सौगात मिलेगी. डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल और लोहिया इंस्टीट्यूट के विलय के बाद अस्पताल की इमरजेंसी में ही ट्रॉमा सर्विसेज शुरू कर दी जाएंगी. इससे मरीजों को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर नहीं ले जाना पड़ेगा. वहीं ट्रांसगोमती इलाकों, बाराबंकी और सुल्तानपुर रोड से आने वाले मरीजों को काफी लाभ होने की उम्मीद जताई जा रही है.

अगले माह तक विलय

डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक डॉ. दीपक मालवीय ने बताया कि अस्पताल और इंस्टीट्यूट के विलय की कार्यवाही तेजी से चल रही है. उम्मीद है कि अगले माह तक दोनो ही संस्थान एक हो जाएंगे. इसके बाद सबसे पहला लक्ष्य ट्रॉमा सर्विसेज शुरू करना है. अभी मरीजों के यहां पर आने के बाद उन्हें केजीएमय के ट्रॉमा सेंटर में रेफर करना पड़ता है. इसके लिए लोहिया इंस्टीट्यूट में पहले से ही न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक, जनरल सर्जरी और एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं. इसलिए ये सेवाएं तुरंत से शुरू की जा सकती हैं.

ट्रॉमा के लिए 30 बेड

डॉ. दीपक मालवीय ने बताया कि ट्रॉमा सर्विसेज को 30 बेड के साथ शुरू किया जाएगा. अभी अस्पताल की इमरजेंसी 40 बेड की है. इसमें ट्रॉमा की सुविधाओं के लिए 30 बेड जोड़े जाएंगे. इस प्रकार यहां पर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर की तरह ही सुविधाएं मिलने लगेंगी.

नई इमारत को भेजा प्रस्ताव

डॉ. दीपक मालवीय ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के लिए काफी जगह की जरूरत होगी. इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है. लोहिया अस्पताल के पास ही प्रसार भारती और एलडीए की काफी जगह खाली पड़ी है. सरकार से अनुरोध किया गया है कि इस जमीन को ट्रॉमा सेंटर की नई इमारत बनाने के लिए दे दिया जाए. यह जमीन मिलती है तो इस पर मल्टीस्टोरी ट्रॉमा की बिल्डिंग बनाई जाएगी. जिसमें हर प्रकार के ट्रॉमा के मरीजों को इलाज मिल सकेगा.

बेड की संख्या

- लोहिया ट्रॉमा : 30

- केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर : 410

- पीजीआई ट्रॉमा सेंटर : 60

फैक्ट फाइल

- लोहिया अस्पताल में बेड : 450

- लोहिया इंस्टीट्यूट में बेड : 350

- मातृ शिशु रेफरल चिकित्सालय में बेड : 200

- विलय के पश्चात इंस्टीट्यूट में कुल बेड : 1000

- केजीएमयू टॉमा में रोजाना भर्ती 150