नडाल का वर्ष 2005 के बाद से पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता में ये सबसे बुरा प्रदर्शन है। चेक गणराज्य के रोसोल को प्रतियोगिता में 100वीं वरीयता मिली है और ये उनके करियर की सबसे अहम जीत रही। वह पहली बार विंबलडन प्रतियोगिता के मुख्य ड्रॉ में खेल रहे हैं। इससे पहले वह पिछले पाँच वर्षों से क्वालिफाइंग के पहले ही दौर में हार रहे थे।

मैच काफी लंबा खिंचा और सेंटर कोर्ट पर ये नतीजा निकला। मगर रोसोल ने बेहतरीन ढंग से सर्व किया और उनके बेसलाइन शॉट्स ने उन्हें ये जीत दिलाने में मदद की। उनके ग्राउंड स्ट्रोक्स भी बेहतरीन थे। नडाल उनके विरुद्ध रक्षात्मक होते दिखाई दिए। सात साल पहले नडाल इस तरह विंबलडन के दूसरे दौर में हारकर बाहर हुए थे।

जीत के बाद रोसोल ने कहा, "मेरे लिए ये एक करिश्मे की तरह है। मैंने कभी इसकी कल्पना नहीं की थी। वह एक सुपरस्टार हैं मगर मैं आज काफी अविश्वसनीय ढंग से खेला। मैं उम्मीद करता हूँ कि एक और मैच मैं ऐसा ही खेल पाऊँ."

नडाल को झटका

शुरू से ही ऐसा नहीं लग रहा था कि इसी नडाल ने सिर्फ़ 18 दिन पहले रिकॉर्ड सातवीं बार फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था। नडाल इससे पहले 2008 और 2010 में विंबलडन का खिताब जीत चुके हैं और उनके नाम कुल 11 ग्रैंड स्लैम खिताब हैं।

नडाल ने इस मैच में तीन सेट प्वाइंट बचाकर पहला सेट जीता मगर धीरे-धीरे रोसोल की धाक जमती गई। मैच में जीतने के बाद रोसोल घुटनों पर बैठ गए, हाथ ऊपर उठाए और फिर उनका चेहरा कोर्ट की घास में जा छिपा।

नडाल पिछले पाँच ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं के फाइनल में पहुँचे हैं और पिछली पाँच बार से विंबलडन के भी फाइनल में खेल रहे थे। चौथे सेट के बाद कम होती रोशनी के बीच अधिकारियों ने मैच 45 मिनट रोका जिससे मैदान के ऊपर की छत बंद की जा सके। नडाल इससे काफी नाखुश थे क्योंकि वह उस समय पूरी लय में थे। इसके बाद जब वह लौटे तो अंतिम सेट नहीं बचा सके और मैच भी उनके हाथ से फिसल गया।

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