- योगी ने जिन सीटों पर किया प्रचार, ज्यादातर में जीत हुई हासिल

- मायावती का समर्थन जनता दल (एस) के लिए साबित हुआ फायदेमंद

- गठबंधन की सरकार बनते देख समाजवादी पार्टी को भी मिली राहत

गुजरात और त्रिपुरा में भी किया प्रचार
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LUCKNOW :
योगी ने कर्नाटक में जिन 33 सीटों पर जाकर जनसभा और रोड शो किए थे, उनमें से ज्यादातर में भाजपा को जीत हासिल हुई है. वहीं दूसरी ओर कर्नाटक चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपना दम दिखाया. जनता दल (एस) को दिए समर्थन ने पार्टी को किंगमेकर की भूमिका में लाकर खड़ा कर दिया है. ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में हुए हिमाचल प्रदेश, गुजरात और त्रिपुरा विधानसभा चुनाव मे भी प्रचार किया था. दोनों ही जगहों पर भाजपा को सरकार बनाने का मौका भी मिला जिससे योगी को भाजपा के स्टार प्रचारकों में शुमार किया जाने लगा.

तीसरे सबसे बड़े स्टार प्रचार बनकर उभरे

यही वजह है कि उन्हें कर्नाटक में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. खास बात यह है कि कर्नाटक में लिंगायत समुदाय को भाजपा के पाले में करने में योगी ने अहम भूमिका निभाई. नाथ संप्रदाय की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले योगी ने कर्नाटक में हिंदुत्व की अलख जगाकर वामपंथी विचारधारा को करारी शिकस्त दी. यही आलम त्रिपुरा चुनाव में भी रहा और वहां भी वामपंथ का किला ढह गया. त्रिपुरा में नाथ संप्रदाय के अस्तित्व का सवाल उठाकर उन्होंने चुनावी समीकरण बदल दिए और कहना गलत न होगा कि भाजपा में पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ तीसरे सबसे बड़े स्टार प्रचार बनकर उभरे हैं.

विवादित मुद्दों का असर भी देखने को मिला
कर्नाटक चुनाव में केवल यूपी के राजनेताओं का ही नहीं, यहां के विवादित मुद्दों का असर भी देखने को मिला. चुनाव से पहले यूपी में दलितों पर अत्याचार का मुद्दा उठाया गया तो चुनाव के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जिन्ना की फोटो का मामला कांग्रेस व अन्य दलों को चुनाव जीतने के एक अवसर के रूप में दिखने लगा. योगी के कर्नाटक दौरे के दौरान यूपी में आए आंधी-तूफान में 63 लोगों की मौत के मामले को वहां के सीएम सिद्धारमैया ने भुनाने की कोशिश की और योगी को वापस यूपी जाने की सलाह देने वाले ट्वीट किए. योगी ने इसका वापस आकर सीधे पीडि़त परिवारों से मुलाकात कर इसका भी करारा जवाब दे दिया.

माया और अखिलेश को राहत
यूं तो कर्नाटक चुनाव कांग्रेस और भाजपा के बीच की जंग माना जा रहा था, लेकिन क्षेत्रीय दलों ने भी इसमें अच्छा प्रदर्शन कर भविष्य की राजनीति के संकेत दिए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा की पार्टी जनता दल (एस) को बिना शर्त समर्थन देकर मायावती ने अपना राजनीतिक कद बढ़ा लिया, क्योंकि बदले हालात में जनता दल अहम भूमिका में आ चुकी है. वहीं सपा ने भले ही चुनाव से दूरी बना रखी हो, लेकिन कांग्रेस को अघोषित समर्थन देकर उसने भाजपा की मुश्किलों में इजाफा करने मे कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी. कांग्रेस ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपने स्टार प्रचारकों में शामिल भी किया था लेकिन अखिलेश ने चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लिया.

- गुजरात में 29 जिलों में 35 सभाएं की, 20 में मिली थी जीत

- हिमाचल चुनाव में 15 रैलियां की, तीन बार जाकर किया प्रचार

- त्रिपुरा चुनाव में सात जनसभाएं, चार रोड शो कर बनाया माहौल

- कर्नाटक चुनाव में 33 सीटों पर किया प्रचार, रोड शो भी किए