कुंभ मेला से पहले शहर की सड़कों पर दिखाई देगा देश के तेरह अखाड़ों का इतिहास और उसकी भव्यता

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ALLAHABAD: प्रयाग की सरजमीं पर आयोजित होने वाले कुंभ मेला की शान में चार चांद लगाने का काम अखाड़ों द्वारा किया जाता है. मेले में जाने से पहले अखाड़ों की ओर से पेशवाई निकाली जाती है ताकि हर किसी को एहसास हो जाए कि मेला शुरू होने वाला है. सनातन संस्कृति में अखाड़ों की महत्ता क्या है, उसकी पौराणिक ता क्या है व उसके कार्य-कार्य क्या हैं. इसके अलावा अखाड़ों के बारे में बहुत सी ऐसी जानकारियां है जिन्हें आम जनमानस बहुत कम जानता होगा. लेकिन इस बार के मेला में देश-दुनिया अखाड़ों का इतिहास से लेकर उसकी परंपरा आदि के बारे में आसानी से जान सकेगी.

होर्डिग्स में होगी इतिहास और महत्ता

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से अखाड़ों की परंपरा जनमानस को बताने के लिए पहली बार प्रयास किया जा रहा है. इसके लिए पहले चरण में शहर के प्रमुख-प्रमुख चौराहों से लेकर प्रचलित स्थलों पर परिषद की होर्डिग्स लगाई जाएगी. परिषद की योजना पहले चरण में सौ स्थानों पर अखाड़ों का इतिहास और कुंभ नगरी में आपका स्वागत नाम से होर्डिग्स लगाने की है. दूसरे चरण के अन्तर्गत दिसम्बर महीने में पूरे कुंभ मेला एरिया में होर्डिग्स लगाई जाएगी.

कंपनियों से चल रही बातचीत

अखाड़ा परिषद द्वारा जितनी भी होर्डिग्स शहरी और मेला एरिया में लगाई जाएगी उसके लिए विज्ञापन एजेंसियों से बातचीत की जा रही है. निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत आशीष पुरी की मानें तो दिल्ली की एक कंपनी से बातचीत अंतिम दौर में चल रही है. होर्डिग्स में क्या-क्या जानकारियां उपलब्ध रहेगी उसको किस तरह की डिजाइन में संवारा जाएगा इन सभी को लेकर जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा. अखाड़ों की सहमति और एजेंसी का चयन होने के बाद होर्डिग्स लगाने का कार्य शुरू कराया जाएगा.

जनमानस में इस चीज को लेकर जिज्ञासा बनी रहती है कि अखाड़ों का कार्य और उसकी मान्यताएं क्या है. कुंभ का आयोजन होने जा रहा है. इसीलिए अखाड़ा परिषद ने शहरी इलाकों के साथ ही मेला क्षेत्र में होर्डिग्स लगवाने की योजना बनाई है.

महंत नरेन्द्र गिरि, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद