- नंदीगांव में मासूम बच्चे को बनाया था निवाला

- शिकारी लखपत रावत की गोली का शिकार बना आदमखोर

बागेश्वर : बागेश्वर का आदमखोर गुलदार आखिरकार ढेर कर दिया गया. शिकारी लखपत सिंह रावत ने आदमखोर को मौत की नींद सुलाया. वैटनरी टीम द्वारा गुलदार का पोस्टमार्टम कर शव जला दिया गया, जबकि उसका विसरा जांच के लिए दून लाया जाएगा. बताया जा रहा है कि गुलदार के दांत और नाखून घिसे हुए थे, िजसके कारण वह शिकार करने में असमर्थ था और आदमखोर हो गया था.

6 वर्षीय बच्ची को बनाया था निवाला

नौ सितंबर को बागेश्वर के नंदीगांव में गुलदार ने छह साल की बच्ची शर्मीली को मार डाला था. इसके बाद भी आदमखोर का आतंक जारी रहा, दो और महिलाओं को गुलदार ने अपना निवाला बनाने की कोशिश की, हालांकि उनकी जान बचा ली गई. गुलदार के आतंक से खौफजदा ग्रामीणों ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर मारने के लिए वन विभाग पर दबाव बनाया. इसके बाद वन विभाग द्वारा आदमखोर को मारने के लिए हंटिंग परमिट जारी किया गया था.

शिकारी लखपत ने साधा निशाना

वन विभाग द्वारा आदमखोर गुलदार को ढेर करने के लिए चमोली जिले के ही शिकारी लखपत सिंह रावत को तैनात किया. शुक्रवार की शाम करीब साढ़े छह बजे शिकारी लखपत सिंह ने 315 बोर की बंदूक से गोली दागी. इसके बाद गुलदार करीब आधा किमी दूर तक दौड़ कर चला गया. शनिवार की सुबह अड़ोली के पास गुलदार का शव वन विभाग की टीम द्वारा बरामद किया गया. टीम में शिकारी लखपत के अलावा वन दरोगा प्रयाग दत्त भट्ट, हरीश सिंह शामिल थे. डॉ. हिमांशु पाठक और डॉ. ज्योति पूना की टीम ने आदमखोर का पोस्टमार्टम किया. उन्होंने बताया कि गुलदार नर था, जिसकी उम्र 12 साल रही होगी. उसके दांत और पंजे घिसे हुए थे, इसी कारण वह आदमखोर हो गया होगा. बागेश्वर के डीएफओ आरके सिंह के अनुसार आदमखोर गुलदार मारा गया है और उसका पोस्टमार्टम कर उसे जला दिया गया है. बिसरा जांच के लिए लैब भेजा जाएगा.

लखपत का 51वां शिकार

बागेश्वर का आदमखोर शिकारी लखपत रावत का 51वां शिकार बना. इससे पहले वह 50 गुलदार और दो बाघों को अपनी गोली का निशाना बना चुके हैं.