- डीडीयूजीयू के अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू व संस्कृत विभागों में नहीं हैं सुविधाएं

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GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी में भाषा विषय की क्लासेज की हालत खस्ता है। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू व संस्कृत की क्लासेज में स्टूडेंट्स बेहद कम उपस्थित हो रहे हैं। स्टूडेंट्स की कम उपस्थिति के कारण क्लास रूम्स की स्थिति भी खराब हो गई है। बेंचों पर धूल की परत पड़ी है, कमरों में भी हालत जुदा नहीं। क्लासेज में आगे की दो-तीन सीटें भी छात्रों के बैठने से भर नहीं पाती हैं। एमए सेमेस्टर 1 व 2 के एग्जाम रिजल्ट नहीं आने को भी एक कारण माना जा रहा है। हिंदी विभाग के साथ एक और समस्या है कि शिक्षकों की कमी से छात्रों को क्लासेज बाधित हो रही हैं।

हिंदी विभाग
समय - दोपहर 12:30
विभाग के अंदर एक शिक्षक व दो कर्मचारी बैठे धूप सेंक रहे थे और एक कमरे में क्लास चल रही थी। शिक्षकों के कमरे सहित विभाग के ज्यादातर कमरे बंद थे। कक्षाओं में छात्रों की कमी का एक कारण यह भी है कि हिंदी विभाग में शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के तहत हिन्दी विभाग में नियुक्ति नहीं हो सकी थी, इसी बीच यूजीसी ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। यूनिवर्सिटी के इस विभाग में दो रिटायर्ड सहित कुल चार शिक्षक हैं। एक शिक्षक के प्रशासनिक काम व एक अन्य के छुट्टी पर चले जाने से इस समय केवल 4 ही बचे हैं। शिक्षकों की इस कमी का प्रभाव छात्रों की उपस्थिति पर पड़ना लाजमी है।

अंग्रेजी विभाग
समय दोपहर 12:45
कला संकाय के ऊपरी हिस्से में पुताई का काम चल रहा है। अंग्रेजी विभाग के ज्यादातर कमरे पेंटिंग के काम से प्रभावित नजर आए। कई कमरों में इस कदर गंदगी व धूल बैठी थी मानों महीनों से किसी का आना-जाना नहीं हुआ हो। लंच कर रहे एक छात्र से कक्षाओं के बारे में पूछने पर उसने बताया कि नियमित तो नहीं लेकिन पढ़ाई होती है। सफाई के सवाल पर वह मुस्कुराने लगा और बताया कि गंदगी का यही आलम कक्षा में हमेशा बना रहता है। इसके अलावा कुछ कमरों में पेंटिंग के प्रोडक्ट खुली पुट्टी, डिस्टेंपर रखे हुए थे। जिससे साफ है कि वहां पर कक्षाएं चलाना ही मुश्किल था।

उर्दू विभाग
समय दोपहर 1:00 बजे
पूरा विभाग खाली पड़ा था। एक कर्मचारी और रिसर्च स्टूडेंट के काम करने के कारण दोनों कमरे खुले हुए थे। बाकि सभी कमरों में ताले लटके हुए थे। कैंपस में कहीं भी स्टूडेंट्स नहीं नजर आ रहे थे। पूछने पर पता चला कि जुमा है तो दो शिक्षक नमाज पढ़ने गए हुए हैं। छात्रों की उपस्थिति के सवाल पर जवाब था कि कक्षा में आना ना आना उनकी मर्जी पर होता है। विभागाध्यक्ष ने बताया कि सप्ताह के शुरुआती दिनों में छात्र अधिक संख्या में कक्षाओं में आते हैं लेकिन मंगलवार के बाद से ही उनकी संख्या कम होने लगती है। विभाग के कॉर्नर पर एक शौचालय जिसे दोबारा बनाने के नाम पर महीनों पहले तोड़ दिया गया था और अभी तक बनाया नहीं गया है जिससे स्टूडेंट्स व कर्मचारियों को काफी परेशानी होती है।

संस्कृत विभाग
समय - दोपहर 1:10 बजे
संस्कृत विभाग में शिक्षकों की तेज हंसी कैंपस में गूंज रही थी। स्र्माट क्लास के सामने के कमरे में कुछ छात्राएं लंच कर अगली कक्षा में जाने की तैयारी कर रही थीं। कक्षाओं के संचालन के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि नियमित कक्षाएं चलती हैं। हालांकि स्मार्ट क्लास सहित ज्यादातर कमरे बंद थे और केवल एक कमरे में लेक्चर चल रहा था। शिक्षक के जाने के बाद छात्राओं से पूछने पर उन्होंने नियमित कक्षाएं चलने की बात कही और छात्रों की कम उपस्थिति के लिए उन्होंने छात्रों को ही जिम्मेदार बताया।

गोरखपुर महोत्सव के बाद से छात्रों की संख्या में गिरावट हुई है। विभाग में शिक्षकों की भी कमी है। इस समय एक शिक्षक छुट्टी पर हैं जबकि एक अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऐसे में विभाग में केवल चार शिक्षक बचे हुए हैं.
- प्रो। अनिल राय, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग

सप्ताह के शुरुआती दिनों में छात्रों की उपस्थिति कक्षाओं में ठीक रहती है। धीरे-धीरे इसमें गिरावट आने लगती है। छात्र आते हैं तो उन्हें शिक्षक कक्षाओं में जरूर मिलते हैं.
- प्रो। रजीउर रहमान, विभागाध्यक्ष