क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : एनजीओ को शेल्टर होम के संचालन का लाइसेंस देने में बरती गई लापरवाही व अनियमितता की परत दर परत खुल रही है. झारखंड पुलिस की ओर से शेल्टर होम चला रहे एनजीओ की गोपनीय जांच में इसका खुलासा हुआ है. इसमें समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत की भी बात सामने आई है. ऐसे में आगे की कार्रवाई को लेकर यह रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है.

कमीशन का चला खेल

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शेल्टर होम के संचालन का लाइसेंस देने में जमकर कमीशन का खेल चला है. समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने पैसे के लेन-देन के मार्फत एक विशेष एनजीओ को ही कई जिलों में शेल्टर होम के संचालन का जिम्मा सौंप दिया. इतना ही नहीं, सीडब्ल्यूसी के गठन में रांची, बोकारो, दुमका, धनबाद जैसे जिलों में पैरवी के आधार पर अध्यक्ष और सदस्यों का चयन किया गया है. रिपोर्ट में कुछ संस्थाओं के फंडिंग पर रोक लगा कर नए संस्थाओं को काम दिए जाने का भी जिक्र है.

संस्था रजिस्टर्ड नहीं, चला रही शेल्टर होम

झारखंड में एक ऐसी भी संस्था है जो रजिस्टर्ड नहीं है, लेकिन पूर्वी सिंहभूम, कोडरमा, दुमका, धनबाद में सात विशेष एडॉप्शन सेंटर और शेल्टर होम इसके नाम से आवंटित हैं. हैरत की बात यह है कि जिन जिलों में संस्था के एडॉप्शन सेंटर और शेल्टर होम हैं वहां उसका कोई आफिस भी नहीं है.