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AGRA. चार माह के अंदर दैवीय आपदा से जिले में 77 मौत हो चुकी हैं. यूं कहा जाए कि वर्ष 2018 जिले के लिए ज्यादा ठीक नहीं रहा तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. 11 अप्रैल को 19 दो मई को 48 और 18 मई को करीब चार मौत हुई थीं. अब दो दिन में छह मौत हो गई हैं.

जनहानि के साथ हुआ है नुकसान
चार माह के अंदर केवल मौत ही नहीं बल्कि बडे़ स्तर पर नुकसान भी हुआ है. पूरे साल की प्रमुख फसल में रवि की फसल आती है, जो कि आंधी बारिश और तूफान की भेट चढ़ गई थी. नुकसान का आंकलन इसी से लगाया जा सकता है कि मुआवजे के तौर पर शासन से 22 करोड़ का बजट आया था. गुरुवार को हुई बारिश में एत्मादपुर में तीन और सदर तहसील में एक मौत हुई. वहीं दूसरी दिन शुक्रवार को दो और मौत हो गईं.

ये तो सेहत के लिए हानिकारक है
पिछले कई वर्षो से बारिश नहीं हो रही थी, जिसके कारण जल स्तर लगातार गिर रहा था. लोग परेशान थे, लेकिन इस साल बारिश ठीक हो रही है, लेकिन हानिकारक साबित हो रही है. दो दिन में छह मौतें हो गई हैं. बारिश को लेकर 30 जुलाई तक हाई एलर्ट जारी किया गया है. ऐसे में जिला प्रशासन ने एक दिन की और स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी है.

पशु पक्षियों की भी हुई मौत
सैकड़ों पशु पक्षियों की अप्रैल और मई में आए आंधी तूफान से मौत हो गई थी. वहीं गुरुवार और शुक्रवार को हुई बारिश से छह मौते के अलावा पशु और पक्षियों की भी मौत हुई है. फसलों में नुकसान की बात करें तो बाजरा की फसल तो बिल्कुल ही नष्ट हो गई है, तो वहीं धान की खेती के लिए बारिश सोना बनकर बरसी है. आगरा जनपद में धान की खेती न के बराबर ही होती है. जबकि बाजरा की खेती अधिक होती है, जो कि बारिश के कारण नष्ट हो गई.

दिया जा रहा है मुआवजा
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राकेश कुमार मालपाणी ने बताया कि मृतकों के परिजनों को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा मोचक निधि से चार चार लाख रुपये के चैक दिए गए हैं, इसके साथ ही मकान और बर्तन आदि के नुकसान का भी मुआवजा दिया गया है. दूसरे