क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : राजधानी में सीवरेज ड्रेनेज का करीब 357 करोड़ रुपए का काम तीन साल से चल रहा है, लेकिन अभी तक 50 परसेंट भी काम पूरा नहीं हो पाया है. अगर समय से और क्वालिटी काम कंपनी नहीं करती है तो उसे ब्लैकलिस्टेड किया जाएगा. ये बातें मेयर आशा लकड़ा ने कहीं. शहर के विकास और परेशानियों का हाल जानने के लिए मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने अधिकारियों की टीम के साथ निरीक्षण किया. इस दौरान वार्ड नंबर एक के एदलहातू, वार्ड नंबर 2 और 3 के मोरहाबादी व चिरौंदी साइट का निरीक्षण किया.

खोदकर छोड़ दी सड़क

विभिन्न मोहल्लों में सीवर लाइन बिछाने के लिए सड़क खोदकर छोड़ दी गई है. इसे देखकर मेयर भड़क गई, उन्होंने कहा कि बार-बार चेतावनी दी जा रही थी कि जहां भी सड़कें खोदी जा रही उसे दोबारा बना दी जाए. इसके बावजूद कंपनी लापरवाही बरत रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण पूरा नहीं कराया जाता है और समय सीमा के अंदर कंपनी काम समाप्त नहीं करती है तो कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा.

2016 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

राजधानी में सीवरेज ड्रेनेज प्रोजेक्ट की शुरुआत 2016 में हुई थी. 30 माह के अंदर इस प्रोजेक्ट को पूरा करना था लेकिन कंपनी ने 3 वर्ष बीतने के बाद भी 50 परसेंट भी काम पूरा नहीं किया. उधर, निर्माण कार्य कर रही ज्योति बिल्डटेक की ओर से बताया गया कि अभी तक 104 किलोमीटर तक पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है. कुल 192 किलोमीटर तक पाइपलाइन बिछानी है.

दूसरी बार अवधि विस्तार

मेयर ने कहा कि सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को राजधानी में बेहतर बनाने के लिए 2015 में ज्योति बिल्डटेक को काम मिला था. अक्तूबर 2017 में कंपनी को नौ वाडरें 1, 2, 3, 4, 5, 30, 31, 32, 33 में काम पूरा कर लेना था. लेकिन काम पूरा नहीं होने पर पहली बार सितंबर 2018 और फि र मार्च 2019 तक अवधि विस्तार कंपनी को दिया गया. मेयर ने बताया कि वार्ड 1 स्थित मिशन गली, राजा बंगला, चंदवे, एदलहातू, वार्ड 2 स्थित सिदो-कान्हू पार्क, गांधी नगर, विद्यापति नगर को मेन लाइन से नहीं जोड़ा जा सका है. ऐसी ही स्थिति अन्य सभी वाडरें की भी है.

पैसे का नहीं हो रहा यूज

सीवरेज-ड्रेनेज के कायरें में लापरवाही का ही नतीजा है कि 14वें वित्त आयोग की तय राशि 1.14 करोड़ का आज तक उपयोग नहीं हो पाया है. हटिया गोंदा से माउंट पॉल स्कूल तक कार्य को अधूरा छोड़ देने के कारण यह राशि आज तक उपयोग में नहीं लाई जा सकी है.