-रैगिंग की सूचना मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज जांच करने पहुंचा प्रशासनिक अमला

-पूछताछ में रैगिंग कबूलने से पीछे हट गए एमबीबीएस फ‌र्स्ट ईयर स्टूडेंट

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ALLAHABAD: आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका थी. एमएलएन मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की जांच करने पहुंचे प्रशासनिक अमले के सामने एमबीबीएस छात्र चुप रहे. उन्होंने अपने साथ हुई रैगिंग की घटना को स्वीकार नहीं किया. यहां तक कि अधिकारियों ने उनसे अकेले में भी बात की लेकिन तब भी उनके मुंह से बोल नहीं फूटे. इसके बाद अधिकारियों ने कॉलेज के एंटी रैगिंग सेल को मामले की जांच करने के आदेश देकर वहां से विदा ले ली.

टीचर्स और एचओडी हुए तलब

एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के बाल मुंडवाने और छात्राओं के तेल लगाकर जूड़ा बांधने के मामले ने गुरुवार को तूल पकड़ लिया. डीएम सुहास एलवाई ने मामले को संज्ञान में लेकर एसीएम प्रथम, सीओ सिविल लाइंस को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा था. इस दौरान कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा ने सभी विभागों के टीचर व एचओडी को भी तलब किया था. सभी के सामने प्रशासनिक टीम ने बैठक कर मामले की जानकारी ली.

सामने नहीं तो मोबाइल पर बता देना

इसके बाद रैगिंग के भुक्तभोगी छात्र-छात्राओं से स्वयं प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने बात की. उनसे पूछताछ की गई कि रैगिंग हुई या नहीं, लेकिन छात्रों ने सहमति नहीं दिखाई. अंत में टीम ने छात्रों को प्रशासनिक अधिकारियों का मोबाइल नंबर प्रोवाइड कराया गया. उनसे बताया गया कि छात्र चाहें तो मोबाइल नंबर पर अधिकारियों से रैगिंग की शिकायत कर सकते हैं. उनकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

जांच करके रिपोर्ट देगी एंटी रैगिंग सेल

डीएम ने बताया कि कॉलेज में पहले से एंटी रैगिंग सेल का गठन हो चुका है. उनको मामले की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए गए हैं. साथ ही सेल को सक्रिय होकर कार्य करने के आदेश भी दिए गए हैं. कॉलेज परिसर में एंटी रैगिंग प्रचार-प्रसार तेज करने को भी कहा गया है. अगर भविष्य में ऐसी शिकायत मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस पर कॉलेज प्रशासन ने रैगिंग के मामले में किसी प्रकार की शिकायत नहीं किए जाने की बात कही. अगर शिकायत आती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

हर साल बाहर आता है रैगिंग का जिन्न

मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सत्र की शुरुआत होते ही रैगिंग का जिन्न बाहर आ जाता है. हर साल अगस्त माह में फ‌र्स्ट ईयर के छात्र सिर मुंडवाकर कैंपस में निकलते हैं. उन्हें सिर झुकाकर लाइन से चलने की सख्त हिदायत दी जाती है. उनके एप्रेन का तीसरा बटन भी लाल कलर का होता है. यह अपने प्रकार का एक कोड है. हालांकि, इस बारे में कोई भी छात्र खुलकर नहीं बोलता. यही कारण है कि रैगिंग की प्रथा चोरी-छिपे साल-दर-साल चली आ रही है.

मामले की सच्चाई पता लगाने के लिए प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को भेजा गया था. इनके सामने छात्र-छात्राएं नहीं बोले. उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए मोबाइल नंबर भी प्रोवाइड कराए गए हैं. कॉलेज की एंटी रैगिंग सेल से मामले की जांच रिपोर्ट मांगी गई है.

-सुहास एलवाई, डीएम