डेयरियां शिफ्ट न होने से शहर में फैल रही गंदगी

कैटल कॉलोनी के लिए एमडीए ने मांगी जमीन

Meerut: हाईकोर्ट की फटकार के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण ने गुरुवार को नगर निगम को पत्र लिखकर जमीन की मांग की है. आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना द्वारा हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दायर एक केस की सुनवाई में कोर्ट ने शासन से प्रदेश के विभिन्न शहरों में डेयरियों को शिफ्ट कर कैटल कॉलोनी विकसित करने पर प्रगति रिपोर्ट तलब की है.

जरा समझ लें..

मेरठ में डेयरियों के गोबर और गंदगी ने ड्रेनेज सिस्टम को ध्वस्त कर रखा है. विभागीय नूरा-कुश्ती के चलते मेरठ में कैटल कॉलोनी का प्रोजेक्ट पिछले 20 सालों से पाइपलाइन में फंसा है. एक बार फिर हाईकोर्ट की फटकार के बाद कैटल कॉलोनी का जिन्न बोतल से निकला है. आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना की एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रदेशभर के सभी शहरों में आबादी के बीच बसी डेयरियों पर स्थिति तलब कर ली. क्योंकि मामला मेरठ से जुड़ा है इसलिए हाईकोर्ट ने मेरठ के प्रशासन, नगर निगम और एमडीए के अधिकारी भी कोर्ट में तलब कर लिए थे. नगर निगम ने एक बार फिर कैटल कॉलोनी के निर्माण का ठीकरा एमडीए पर फोड़ दिया तो वहीं एमडीए ने जमीन की कमी का हवाला दिया और कहा कि-नगर निगम जमीन दे दे तो वे (एमडीए) कैटल कॉलोनी विकसित कर देंगे.

दो साइट पर सुझाव

एमडीए के चीफ इंजीनियर दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि नगर निगम को जमीन उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र लिखा गया है. वहीं आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना का कहना है कि पूर्व में एमडीए को नगर निगम के दो बड़े भू-भाग के बारे में जानकारी दी गई है. गगोल रोड पर काशी-अछरौंडा गांव के समीप नगर निगम की करीब 75 एकड़ भूमि पड़ी है. शहरी आबादी से दूर इस स्थान पर कैटल कॉलोनी को विकसित किया जा सकता है. हालांकि पूर्व में नगर निगम के प्रस्ताव पर एमडीए इस भू-भाग पर इको पार्क डेवलेप करने की योजना बना रहा है. नगर निगम ने इको पार्क के निर्माण के लिए एमडीए को 2 करोड़ 20 लाख 91 हजार 820 रुपये की धनराशि भी दे दी है. वहीं एक अन्य साइट किला परीक्षितगढ़ रोड पर है. यहां नगर निगम के स्वामित्व की 50 एकड़ भूमि है, जिस पर कैटल कॉलोनी विकसित की जा सकती है.

डेयरी होगी शिफ्ट

एक सर्वे के मुताबिक इन दोनों साइट पर कैटल कॉलोनी के विकसित होने के बाद शहर के 40 वार्डो की अवैध डेयरियां शिफ्ट हो जाएंगी. इससे न सिर्फ शहरवासियों को गंदगी से निजात मिलेगी बल्कि व्यवस्थित कारोबार भी विकसित हो सकेगा. हाईकोर्ट के निर्देश पर एमडीए ने गुरुवार को नगर निगम को पत्र लिखकर जमीन उपलब्ध कराने की मांग की. दोनों साइट्स का जिक्र करते हुए एमडीए ने हाईकोर्ट और शासन के निर्देशों का हवाला भी पत्र में दिया है.

कैटल कॉलोनी के लिए नगर निगम को जमीन उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है. नगर निगम जमीन दे दे तो एमडीए कैटल कॉलोनी को विकसित कर देगा. इस संबंध में जिला प्रशासन से भी निर्देश लिया जा रहा है.

राजकुमार, सचिव, एमडीए, मेरठ