-शहर की सरकार को शपथ ग्रहण के एक माह के अंदर करनी होती है पहली बैठक

-इसी के साथ ही शुरू होता विकास का खाका खींचा जाना

-मिनी सदन भवन के टूट जाने के बाद कहां चलेगा मिनी सदन, नहीं हुआ अब तक तय

varanasi

शहर की सरकार चुने जाने के बाद उसे शपथ लिए हुए एक पखवारे का वक्त बीत गया है. लेकिन उसकी बेहद जरूरी पहली बैठक कहां होगी यह तय नहीं हो सका है. जबकि शपथ लेने के एक महीने के भीतर पहली बैठक करना अनिवार्य होता है. जब तक यह बैठक नहीं होगी तब तक शहर के विकास का खाका नहीं खींचा जा सकता है. मिनी सदन की पहली बैठक ना होने की वजह मिनी सदन भवन का टूट जाना है. लेकिन उसके विकल्प में बैठक के लिए अब तक कोई स्थान न तलाशा जाना यह प्रशासन की लापरवाही दर्शाता है.

कोई नहीं गंभीर

निकाय सरकार को लेकर न तो नगर निगम ही गंभीर है और न ही नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधि. यही वजह है कि अभी तक मिनी सदन कहां चलेगा, इस बाबत अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है. निकाय सरकार जनता चुनती है, इसलिए नौकरशाहों की ओर से हो रही देरी को लेकर पार्षदों में नाराजगी भी है. शहर की सरकार की पहली बैठक में हो रही देरी की वजह नगर निगम मुख्यालय में मौजूद मिनी सदन भवन का टूट जाना है. इसे तोड़कर प्रेक्षागृह समेत बड़े एरिया में जापान के सहयोग से कनवेन्शन सेंटर बनाया जा रहा है.

हालांकि नगर निगम प्रशासन का दावा है कि बैठक के लिए मिनी सदन भवन के विकल्प देखे गए हैं. इनमें सांस्कृतिक संकुल के अलावा जेपी मेहता, क्वींस कालेज हैं. नगर निगम मुख्यालय में टेंट लगाकर मिनी सदन संचालित करने पर भी मंथन किया जा रहा है.

शहर का होगा नुकसान

-मिनी सदन की हर बैठक शहर के विकास के लिए बेहद अहम है

-निकाय सरकार की पहली बैठक का महत्व यह है कि उसी तारीख से निकाय सरकार के कार्यकाल की मियाद तय की जाती है

-पहली बैठक में ही कार्यकारिणी के लिए 12 सदस्यों का नाम भी तय कर गठन कर दिया जाता है.

-इसके बाद दूसरी बैठक कार्यकारिणी की होती है जिसमें उपसभापति का चुनाव किया जाता है.

-अगर पहली बैठक नहीं होती है तो पूरी प्रक्रिया तय करने के दौरान मार्च में होने वाली बजट बैठक भी प्रभावित हो सकती है

-बजट बैठक से पहले जो तैयारी होती है उसमें करीब एक माह लगता है

-दिसंबर के अंतिम दिनों में भी मिनी सदन की पहली बैठक हुई तो कार्यकारिणी गठन व उपसभापति के मनोनयन की प्रक्रिया में जनवरी माह बीत जाएगा

-बजट बैठक के लिए पहले नगर निगम प्रशासन गोपनीयता के साथ प्रस्ताव तैयार करता है

-कार्यकारिणी की बैठक में इसे पहले रखा जाता है. इसमें पास होने के बाद ही बजट का गोपनीय प्रस्ताव मिनी सदन के पटल पर रखा जाता है.

-नगर निगम अधिनियम के अनुसार एक वर्ष में छह बैठकें जरूरी होती हैं

-साधारण व बजट बैठकों के अलावा विशेष बैठकें शामिल हैं

-कार्यकारिणी की 12 बैठकें होनी चाहिए. इसमें मिनी सदन में रखने वाले प्रस्तावों पर पूर्व में ही विचार किया जाता है

सदन की पहली बैठक जनवरी के दूसरे सप्ताह तक बुलाने की योजना है. इसके लिए ऐसे स्थान की तलाश की जा रही है. जहां रुपये खर्च ना करना पड़े. कमिश्नरी कार्यालय सभागार में बैठक आयोजित की जा सकती है.

मृदुला जायसवाल, मेयर

सदन की पहली बैठक के लिए सांस्कृतिक संकुल समेत कई स्थान चिह्नित किये गये हैं. स्थान तय होते ही पहली बैठक की तिथि भी तय कर ली जाएगी.

डॉ. नितिन बंसल, नगर आयुक्त

मिनी सदन की बैठक नहीं होने से नुकसान हो रहा है. इसके साथ ही शहर के विकास का खाका खींचा जाता है. लगता है इसे जानबूझकर टाला जा रहा है.

सीताराम केशरी, नेता पार्षद दल कांग्रेस