हिन्दुस्तानी एकेडेमी द्वारा महीयशी महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि पर उनके काव्य चिंतन पर आयोजित की गई गोष्ठी

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ALLAHABAD: हिन्दुस्तानी एकेडेमी की ओर से मंगलवार को एकेडेमी सभागार में महीयशी महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके काव्य चिंतन पर गोष्ठी का आयोजन किया गया. वक्ता डॉ. यास्मीन सुल्ताना नकवी ने कहा कि महादेवी जी का काव्य साहित्य विश्व की धरोहर है. विदेशों में वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की कवियित्री का स्थान ग्रहण कर चुकी हैं. वह जितनी प्रसिद्ध कवियित्री हैं उससे कही महत्वपूर्ण गद्य लेखिका हैं. उनकी कविताएं व्यक्तिगत हैं तो गद्य साहित्य सार्वजनिक है. इतना ही नहीं प्रत्येक गद्य पंक्ति एक संदेश देती हुई दिखाई देती हैं.

दिव्य पुरुष को माना प्रेम का ईष्ट

दूसरी वक्ता डॉ. कल्पना वर्मा ने कहा कि उन्होंने दिव्य पुरुष को अपना प्रेम ईष्ट मानकर उसके साथ रागात्मक संबंध की स्थापना की. इसलिए उनकी प्रणयानुभूति और रहस्यानुभूति एक दूसरे में रच बस गई हैं. डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि वे आधुनिक युग के टूटते मापदंडों व विघटित होते मूल्यों व खन्डित होती आस्था की प्रतीक हैं. एकेडेमी के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. इस मौके पर डॉ. अनुपम आनंद, श्रीराम मिश्रा, सभापति मिश्रा, हरि मोहन मालवीय आदि मौजूद रहे.

नारी स्वतंत्रता के लिए किया संघर्ष

अखिल भारतीय कायस्थ महासभा की ओर से महीयशी की पुण्यतिथि पर गोष्ठी का आयोजन किया गया. सचिव सुमित श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने हमेशा नारी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया जिसका प्रभाव उनके साहित्य में दिखाई देता है. इस मौके पर कृपा शंकर श्रीवास्तव, राजेश वर्मा, अखिलेश श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे.