- कड़ी सुरक्षा के बीच नगर निगम कार्यालय पहुंचे नगर आयुक्त, पार्षदों ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को भेजा इस्तीफा

- नगर आयुक्त बोले, प्रशासन से मिला पूरा सहयोग, किसी तरह का काम नहीं हुआ प्रभावित

- मेयर उमेश गौतम ने कहा, नहीं मानी गईं पार्षदों की मांगें, नगर आयुक्त के ट्रांसफर पर अड़े

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नगर निगम प्रकरण

01 जून से चल रहा था धरना प्रदर्शन।

16 दिन तक नगर आयुक्त को घुसने नहीं दिया।

11 जून - नगर आयुक्त का पुतला फूंका, तोड़ी धारा 144

15 जून - 6 भाजपा पार्षदों समेत 29 पर हुआ मुकदमा

बरेली : नगर निगम प्रकरण में प्रशासन की सख्ती के आगे भाजपा पार्षदों की एक नहीं चली। परिसर में धरना तो नहीं दे सके, पर विरोध में सामूहिक इस्तीफा दिया है। वहीं, फोर्स के साथ नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन ने कार्यभार संभाल लिया। वह 16 दिन बाद अपने ऑफिस में बैठे। एक जून से पार्षद उनके कमरे के बाहर बैठकर धरना दे रहे थे। उधर, मेयर उमेश गौतम भी नगर निगम कार्यालय पहुंचे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर निगम परिसर में फोर्स तैनात है।

छावनी बना निगम परिसर

सुबह होते ही नगर निगम परिसर छावनी में तब्दील हो गया। शांति व्यवस्था कायम करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। जिला प्रशासन की सख्ती को देखते हुए और मुकदमा दर्ज हो जाने के बाद पार्षदों के तेवर नरम पड़ गए थे। संडे को शांति रही। मंडे को फोर्स के साथ नगर आयुक्त कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बात भी की।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को भेजा इस्तीफा

साथी पार्षद पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग पर धरने पर बैठे पार्षदों की मांगे नहीं मानी गईं। मुकदमा वापस होने की बजाए शांति व्यवस्था भंग करने पर पार्षदों पर मुकदमे दर्ज अलग हो गए। इससे गुस्साए पार्षदों ने मेयर के जरिए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को सामूहिक इस्तीफा भेजा है। हालांकि यह अभी मंजूर नहीं हुआ है। पार्षद नगर आयुक्त के ट्रांसफर कराए जाने की मांग पर भी अड़े हुए हैं।

लखनऊ जाएंगे मेयर

मेयर उमेश गौतम ने बताया कि एक दूसरे सिलसिले में संगठन के साथ बैठक होनी है। बैठक में शामिल होने के लिए आज लखनऊ जाना है। अगर संभव हुआ तो इस प्रकरण को भी उठाया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष को पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा भेज दिया है। इस संबंध में भी बात की जाएगी।

तोड़ी थी धारा 144

सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने नगर निगम परिसर में धारा 144 लागू की थी। इसके बावजूद पार्षदों ने धरना प्रदर्शन किया। इसके अलावा नगर आयुक्त का पुतला बनाकर उस पर जूते मारने जैसा दुस्साहसिक कार्य किया। इतना ही नहीं, बैरिकेडिंग तोड़कर मेयर व पार्षद निगम परिसर में दाखिल हुए। मेयर, भाजपा जिलाध्यक्ष व महानगर अध्यक्ष भी धरने में शामिल हुए। धारा 144 के उल्लंघन में भाजपा के छह पार्षदों समेत 29 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया।

यह है मामला

इंदिरा मार्केट में नगर निगम ने सालों पहले फड़ आवंटित किए गए थे। सरकार की नई नीति बनी तो पोर्टेबल शॉप आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें मनमानी का आरोप लगा। आरोप यह था कि अवैध तरीके से इंदिरा मार्केट और जिला पंचायत रोड पर करीब तीन सौ पोर्टेबल शॉप आवंटित कर दी गई हैं। शिकायत पहुंची तो जांच कराई गई। जांच में गड़बड़ी मिली। इसमें भाजपा पार्षद विनोद सैनी का भी नाम सामने आया।

पार्षद पर मुकदमे के बाद बढ़ा विवाद

नगर आयुक्त ने भाजपा पार्षद विनोद सैनी समेत तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज करा दिया था। इससे तिलमिलाए भाजपा पार्षद एकजुट होकर धरने पर बैठ गए और पार्षद के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने और नगर आयुक्त के ट्रांसफर की मांग करने लगे। इस बीच नगर आयुक्त अपने कार्यालय पहुंचे तो पार्षदों ने उन्हें घेर लिया। नगर आयुक्त ने समझाने की कोशिश की तो पार्षद हाथापाई पर उतारू हो गए और उनके ऑफिस के बाहर धरना देकर बैठ गए। उन्हें अंदर आने नहीं दिया। 16 दिन नगर आयुक्त बाहर रहे।

वर्जन -

जिला प्रशासन से पूरा सहयोग मिला है। धरना प्रदर्शन के बावजूद काम प्रभावित नहीं हुआ। नालों की साफ-सफाई का काम जारी है। पॉलीथिन मुक्त अभियान भी चल रहा है। हमारा किसी से कोई विवाद नहीं है। विकास कार्यो में जो सहयोग करना चाहेगा, उसका सहयोग लिया जाएगा। इस मामले में प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई की है। नगर निगम भी सख्त कार्रवाई करेगा।

- सैमुअल पॉल एन, नगर आयुक्त

धरना प्रदर्शन करने के बावजूद पार्षदों की मांगें नहीं मानी गई हैं। पार्षदों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। इससे नाराज पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दिया है। फिलहाल, इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। पार्षदों की लड़ाई नगर आयुक्त के ट्रांसफर होने तक जारी रहेगी। लखनऊ जाकर इस मामले में संगठन से बात करुंगा।

- उमेश गौतम, मेयर