-मेंटल हॉस्पिटल में 11 वर्ष से काट रही थी अनचाही कैद

-अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून के आदेश पर लायी गई थी बरेली

BAREILLY: जन्माष्टमी के त्योहार पर 11 वर्ष बाद एक महिला अनचाही कैद से आजाद हो गई. वह मेंटल हॉस्पिटल में 11 साल से रह रही थी, क्योंकि उसके अपनों का पता नहीं चल पा रहा था. मनो समर्पण मनो समाजिक सेवा समिति के शैलेश कुमार ने कोलकाता में जाकर उसे परिवार को ढूंढा और मंडे को उसके परिवार को उसे मेंटल हॉस्पिटल से बाहर निकालकर अपने साथ ले गए.

अचानक हो गई थी लापता

55 वर्षीय शिखा पुत्री नोनी गोपाल दास, पश्चिम बंगाल के वासदा, पलासी देवरा मिदनीपुर की रहने वाली थी. शिखा 11 वर्ष पहले अचानक लापता हो गई थी. वह भटकते हुए देहरादून पहुंच गई थी. अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देहरादून के आदेश पर उसे मेंटल हॉस्पिटल बरेली में दाखिल किया गया था. वह तब से हॉस्पिटल में ही रह रही थी. इलाज मिलने से वह सभी हो गई थी. हॉस्पिटल के द्वारा उसके द्वारा बताए पते पर संपर्क भी किया गया था. जब शैलेश कुमार ने उससे कई बार काउंसलिंग कर बात की तो उसने अपना पता बता दिया.

परिजनों ने मान लिया था मृत

शैलेश ने पश्चिम बंगाल पुलिस से सपंर्क किया, लेकिन उसके परिजनों का पता नहीं चला. 14 जुलाई को शैलेश पश्चिम बंगाल गए और उसके परिजनों को फोटो दिखाई तो उन्होंने पहचान लिया. उन्होंने उसे मृत मान लिया था. उसके बाद कागजी कार्रवाई की गई ओर मंडे को भाई हिमांशु और बहन आभादास बरेली आकर उसे साथ लेकर गए. बहन आभादास शिखा को लेने बरेली आयी और अपने साथ ले गए.