- तीस किमी क्षेत्र से गुजरेगी मेट्रो, बिल्डर सक्रिय

- एक जुलाई से होगा सर्किल दरों के लिए सर्वे

आगरा। मेट्रो शहर को जाम से निजात तो दिलाएगी ही इसके साथ ही जमीनों की कीमतों में जान डालने का भी काम करेगी। प्रशासन नए सिरे से सर्किल रेट बढ़ाए जाने पर काम शुरू कर दिया है, तो वहीं बिल्डर भी सक्रिय हो गए हैं। डीपीआर के समय से ही दोनों कॉरीडोर के आसपास बिल्डरों ने जमीन खरीद ली है या फिर सौदा करने में जुटे हुए हैं। मेट्रो का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मिल चुकी है मंजूरी

आगरा मेट्रो को दिल्ली में आयोजित पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड(पीआईबी) की बैठक में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बजट में आगरा की मेट्रो के लिए 175 करोड़ देने का प्रावधान किया है। प्रदेश सरकार की मंशा है कि जल्द से जल्द मेट्रो का कार्य शहर में शुरू किया जाए। इसके साथ ही कई विषयों पर कार्य शुरू भी हो चुका है। इसके लिए वर्षो से जो फाइलें आलमारियों में धूल फांक रहीं थीं, उन्हें बाहर निकाला जा रहा है।

सफर करने का जल्द ही मिलेगा मौका

आगरा के लोगों की जल्द ही मेट्रो में सफर करने की उम्मीद पूरी होने जा रही है। अखिलेश सरकार से लेकर अब तक मेट्रो के नाम पर सिर्फ सपना ही देखने को मिल रहा था। इस योजना को केंद्र सरकार की सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद आवास विभाग की ओर से भी सहमति मिल गई थी, लेकिन पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड की ओर से सहमति नहीं मिल पाई थी। लेकिन बुधवार को यहां से भी सहमति मिल गई। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने बजट सत्र में आगरा मेट्रो के लिए 175 करोड़ देने की घोषणा के साथ ही शहर वासियों की उम्मीद पूरी होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। नगर नियोजक आरके सिंह ने बताया कि पीआईबी की सहमति के साथ ही योजना को केंद्रीय कैबिनेट में भी सफलता मिल चुकी है। यहां से भी जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। वहीं दूसरी ओर आगरा में मेट्रो को गति देने के लिए प्रदेश सरकार ने बजट देने की भी प्रक्रिया को पूर्ण कर दिया है।

जल्द हो सकता है शिलान्यास

उम्मीद जताई जा रही है कि मेट्रो परियोजना का शिलान्यांस जल्द ही होगा। जल्द ही मेट्रो ट्रेन का कार्यालय स्थापित हो जाएगा। हालांकि कार्यालय के लिए अभी स्थान चयनित नहीं हो सका है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि पीएसी परिसर में कार्यालय खोला जाएगा। पीएसी परिसर में यार्ड का निर्माण भी प्रस्तावित है।

ये होगी कुल दूरी

कॉरीडोर एलिवेटिड अंडरग्राउंड कुल

- सिकंदरा-ताज पूर्वी गेट 6.353 किमी 7.647 किमी 14 किमी

- आगरा कैंट- कालिंदी विहार 16 किमी - 16 किमी

यहां होंगे स्टेशन

पहला कॉरिडोर- सिकंदरा से ताज पूर्वी गेट

सिकंदरा, गुरु का ताल, आईएसबीटी, शास्त्रीनगर, यूनिवर्सिटी, आरबीएस कॉलेज, राजामंडी, आगरा कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, जामा मस्जिद, आगरा फोर्ट, ताज महल, फतेहाबाद रोड, बसई, ताज पूर्वी गेट

दूसरा कॉरीडोर- आगरा कैंट से कालिंदी विहार

आगरा कैंट, सुल्तानपुरा, सदर बाजार, प्रतापपुरा, कलक्ट्रेट, सुभाष पार्क, आगरा कॉलेज, हरीपर्वत, संजय पैलेस, एमजी रोड, सुल्तानगंज की पुलिया, कमला नगर, रामबाग, फाउंड्री नगर, मंडी, कालिंदी विहार

ये स्टेशन होंगे अंडरग्राउंड

परियोजना के अनुसार पहले कॉरिडोर के आठ स्टेशन अंडरग्राउंड होंगे। इसमें यूनिवर्सिटी, आरबीएस कॉलेज, राजामंडी, आगरा कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, जामा मस्जिद, आगरा फोर्ट, ताजमहल स्टेशन।

पहला कॉरिडोर होगा अंडरग्राउंड

सिकंदरा से ताजमहल से पूर्वी गेट तक प्रस्तावित पहले कॉरिडोर के अंतर्गत खंदारी से ताजमहल तक मेट्रो ट्रेन अंडरग्राउंड जाएगी। यानीकि पहले कॉरिडोर के अंतर्गत मेट्रो अधिकांश दूरी अंडर ग्राउंड ही चलेगी। दूसरा कॉरीडोर एलिवेटिड होगा।

दो डिपो बनाएं जाएंगे

मेट्रो ट्रेनों के संचालन के लिए दोनों कॉरिडोर पर एक एक डिपो तैयार किया जाएगा। परियोजना के अनुसार, पीएसी ग्राउंड पर 16.3 हेक्टेयर जगह में मेट्रो ट्रेनों के लिए मरम्मत डिपो और दूसरा कालिंदी विहार में 11.9 हेक्टेयर की जमीन पर बनेगा।

एक जुलाई से शुरू होगा सर्वे

एक जुलाई से सर्किल रेट का सर्वे शुरू होगा। जिन क्षेत्रों से मेट्रो गुजरेगी वहां पर निश्चित तौर पर सर्किल दरों में बढ़ोत्तरी हो सकती है। वहीं दूसरी ओर बिल्डर भी सर्किय हैं। वे जमीनों का सौदा कर रहे हैं।

मेट्रो शहर के लिए शुभ संकेत है। इससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी। निश्चित तौर पर जमीन की कीमतों में उछाल आएगी। इसके साथ ही एयरपोर्ट और यमुना बैराज के कार्य से भी लाभ मिलेगा।

संतोष कटारा

गवर्निग काउंसिल मेम्बर, क्रेडाई उत्तर प्रदेश

जिस क्षेत्र में विकास होता है, या फिर कनेक्टिविटी बढ़ती है, वहां पर सर्किल दरों में बढ़ोत्तरी संभव है। किस क्षेत्र में बढ़ोत्तरी संभव है या नहीं यह सर्वे के बाद ही तय हो सकेगा।

एनजी रवि कुमार

डीएम

मेट्रो परियोजना दूरगामी तो ठीक साबित हो सकती है। रीसेंटली ठीक नहीं है। अभी देखा जाए तो यहां पर छोटी बसों की जरूरत है। इसके साथ ही सर्वे के दौरान जिन क्षेत्रों से मेट्रो गुजरे वहां पर सर्किल दरें बिल्कुल भी न बढ़ाई जाएं।

केसी जैन, एडीएफ सचिव