GORAKHPUR: मेट्रो मैन इं. श्रीधरन ने बुधवार को गोरखपुर मेट्रो के प्रस्तावित रूट का स्थलीय निरीक्षण किया. करीब चार घंटे तक उन्होंने एक-एक प्वॉइंट पर पहुंच मेट्रो दौड़ाने की संभावनाओं को तलाशा. देर रात उन्होंने राइट्स और जीडीए के अधिकारियों के साथ मेट्रो के प्रस्तावित डीपीआर पर चर्चा की. इं. श्रीधरन बुधवार दोपहर करीब 12.30 बजे गोरखपुर एयरपोर्ट पर पहुंचे. राइट्स के अधिकारियों के साथ पार्क रोड स्थित एक होटल में पहुंचे. जहां उन्होंने राइट्स और लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों के साथ मेट्रो के प्रस्तावित कॉरिडोर पर चर्चा की.

किया मेट्रो रूट का निरीक्षण

बुधवार दोपहर करीब 3.30 बजे श्रीधरन होटल से मेट्रो का प्रस्तावित रूट का निरीक्षण करने निकले. वे सबसे पहले देवरिया रोड पर सूबा बाजार पहुंचे. जहां से जंगल सिकरी के पास प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया. करीब 10 मिनट तक प्रस्तावित डीपीआर का ले-आउट देखने के बाद इंजीनियरिंग गेट, गिरधरगंज बाजार, कूड़ाघाट, मोहद्दीपुर होते हुए रेलवे स्टेशन के गेट संख्या 6 के सामने पहुंचे. जहां उन्होंने मेट्रो के प्रस्तावित जंक्शन का निरीक्षण किया. मेट्रो के दोनों कॉरिडोर का जंक्शन गेट नंबर 6 से लेकर यातायात तिराहे के बीच में प्रस्तावित है. इसके बाद अधिकारी गोरखनाथ से बरगदवां होते हुए श्याम नगर पहुंचे. श्याम नगर में ठहर कर अधिकारियों से स्थलीय निरीक्षण किया. इसके बाद अधिकारी बरगदवां, फर्टिलाइजर होते हुए गुलरिहा थाना पहुंचे. गुलरिहा थाना से मेडिकल कॉलेज, असुरन, काली मंदिर होते हुए वापस पार्क रोड स्थित होटल पहुंच गए. इस दौरान लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एमडी कुमार केशव, मुख्य आर्किटेक्ट रवि जैन, मुख्य अभियंता रमेश कुमार, जीडीए के सहायक अभियंता एसपी अरविंद आदि मौजूद रहे.

'नई मेट्रो नीति के तहत बन रहा डीपीआर'

लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के एमडी कुमार केशव ने बताया कि गोरखपुर मेट्रो का डीपीआर शहरी विकास मंत्रालय द्वारा नई मेट्रो नीति के तहत बनाया जा रहा है. डीपीआर का काफी हिस्सा बन गया है. करीब 45 दिन में डीपीआर बन कर पूरा होने की उम्मीद है. डीपीआर के साथ ही कम्प्रेहेंसिव मूबिल्टी प्लान (सीएमपी) पर भी काम हो रहा है. उधर, जंगल सिकरी में मीडिया से बातचीत में ई. श्रीधरन ने कहा कि गोरखपुर में पहली बार आया हूं. काफी अच्छा माहौल है. मेट्रो के संचालन को लेकर यह प्राथमिक दौरा है. मेट्रो कब शुरू होगी, कैसे होगी, इसपर अभी काफी कुछ काम होना है. उन्होंने कहा कि मेट्रो के दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं. एक रूट 18 किमी का होगा तो दूसरा 12 किमी का. गोरखपुर में जमीन अधिग्रहण जैसी कोई समस्या नहीं है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मेट्रो में केंद्र और प्रदेश सरकार आर्थिक सहयोग करती है. फिलहाल मेट्रो को लेकर फंडिंग की कोई समस्या नहीं है. उन्होंने कहा कि मेट्रो को लेकर प्रशासन और जीडीए के अधिकारियों से सकारात्मक वार्ता हुई है. पूरा रूट देखने के बाद अधिकारियों के साथ वार्ता होगी. पूरे प्रकरण को लेकर गुरुवार को अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

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सीएमपी पर हुआ मंथन

सीएम सिटी में मेट्रो दौड़ाने को लेकर विभिन्न विभागों ने अपनी स्पीड काफी बढ़ा दी है. बुधवार को इं. श्रीधरन के गोरखपुर आने से पहले जीडीए, राइट्स, एलएमआरसी, वायु सेना, नगर निगम, परिवहन आदि विभागों के अधिकारियों ने मेट्रो के लिए तैयार की जाने वाली सीएमपी (कंप्रेहेंसिव मूबिल्टी प्लान) पर मंथन किया. सभी विभागों के अधिकारियों की सहमति के बाद इस यातायात योजना को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी भी दे दी गई है. अब इसे संबंधित मंत्रालयों को भेजा जाएगा. उनकी मंजूरी के बाद इसे फाइनल किया जाएगा. मेट्रो के लिए सीएमपी व डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी राइट्स को दी गई है. गोरखपुर शहर के लिए नई मेट्रो नीति के तहत सीएमपी व डीपीआर तैयार कराई जाएगी. बैठक में जीडीए उपाध्यक्ष अमित बंसल, चीफ इंजीनियर संजय सिंह, एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव, राइट्स के चीफ इंजीनियर रमेश कुमार व चीफ आर्किटेक्ट रवि जैन के अलावा नगर निगम, परिवहन, एयरफोर्स व अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे.

18 रूटों पर चलेगी सिटी बस

सीएमपी में गोरखपुर शहर के यातायात प्रबंधन को लेकर खांका खीचा गया है. भविष्य के संभावित यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए सीएमपी तैयार की गई है. सीएमपी में शहर स्थित कचहरी व रेलवे बस स्टेशन को शहर के बाहर शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है. साथ ही बेहतर सिटी ट्रांसपोर्ट सुविधा के लिए महानगर के 18 रूटों पर सिटी बस चलाने को भी योजना में शामिल किया गया है. मालवाहन वाहनों के लिए अलग से फ्रेट कॉरिडोर बनाने की भी सलाह दी गई है, जिससे जाम की स्थिति से बचा जा सके. वहीं, शहर स्थित ट्रांसपोर्टनगर को भी पूरी तरह से बाहर शिफ्ट करने की योजना को सीएमपी में शामिल किया गया है. ट्रांसपोर्ट नगर के शिफ्ट हो जाने से शहरी यातायात में काफी सहूलियत होगी व शहर के पुराने हिस्सों में संकरे रास्तों से बड़े वाहनों के गुजरने से होने वाली परेशनियों से निजात मिल सकेगी.