JAMSHEDPUR: महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोमवार को मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। दोपहर में एक मां-बेटी घायल अवस्था में अस्पताल पहुंची थी। लेकिन उन्हें एंबुलेंस से उठाकर इमरजेंसी विभाग में ले जाने वाला तक कोई नहीं था। वे काफी देर तक एंबुलेंस में ही पड़ी रहीं। बाद में घायल के परिजन किसी तरह से उसे इमरजेंसी विभाग में ले गए। करीब आधे घंटे के बाद उन्हें स्ट्रेचर मिला। इमरजेंसी विभाग में बेड नहीं था, इसे देखते हुए घायलों को स्ट्रेचर पर ही लेटा दिया गया।

चांडिल स्टेशन पर हुआ हादसा

धनबाद स्थित हीरापुर निवासी माला सिंह व उनकी बेटी कावेरी सिंह स्वर्णरेखा एक्सप्रेस से चांडिल स्थित चौका में अपने रिश्तेदार के यहां आ रही थी। इसी दौरान चांडिल स्टेशन पर उतरने के क्रम में माला सिंह चक्कर खाकर गिर पड़ी। उन्हें बचाने के क्रम में उनकी बेटी का पैर ट्रेन में फंसकर टूट गया। वहीं माला सिंह के सिर में चोट आई है। दोनों को चांडिल में प्राथमिक उपचार के बाद एमजीएम रेफर कर दिया गया। यहां पर दर्द से मां-बेटी तड़पती रहीं। परिजनों का कहना था कि सरकारी अस्पताल में कोई देखने वाला नहीं है। एक डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन दिया गया है पर दर्द थोड़ा भी कम नहीं हो रहा है। इस कारण से कावेरी सिंह को दांत भी लग जा रहा था। इसे देखते हुए परिजन दोनों को निजी अस्पताल में लेकर चले गए। वहीं चिकित्सकों का कहना है कि पैर टूट जाने की वजह से दर्द दे रहा है। प्लास्टर करने के बाद ही दर्द कम होगा। वार्ड से सभी डॉक्टर चले गए हैं। अब मंगलवार को ही प्लास्टर हो सकेगा।

मरीजों की बढ़ रही परेशानी

एमजीएम अस्पताल पहुंचने वाले करीब-करीब हर मरीजों को परेशानी हो रही है। अस्पताल में न तो वार्ड ब्वाय है और न ही ड्रेसर। इसकी वजह से मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। वार्ड ब्वाय नहीं होने से मरीजों को शिफ्ट करने वाला कोई नहीं है। वहीं ड्रेसर के पद रिक्त होने के कारण घायलों को ड्रेसिंग सफाई सेवक काफी मशक्कत के साथ कर रहे हैं।