- आज की डिबेट: डीडी पुरम स्थित बॉडी पॉवर जिम में सुबह 8:30 बजे.

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BAREILLY: किस नेता के हाथ में देश की कमान देनी है. इसे लेकर यूथ ने अपना एजेंडा तय कर लिया है. यूथ ऐसी सरकार चुनना चाहता है जो देश के विकास और सिक्योरिटी के साथ ही यूथ के लिए भी काम करे, महिलाओं की सुरक्षा के लिए कारगर कदम उठाए और एजुकेशन सिस्टम को ऐसा बनाए कि पढ़ लिखकर यूथ रोजगार के लिए न भटके. जो भी प्रत्याशी चुनकर आए वह मात्र सहानुभूति दिखाने वाला न हो बल्कि उसके पास विकास की योजनाएं हों जिससे वह यूथ के साथ ही समाज और देश के डेवलेपमेंट के बारे में सोच सके और देश के डेवलेपमेंट में रोड़ा न लगाए. कोरी राजनीति करने वाले नेताओं को इस बार यूथ ने सबक सिखाने की ठान ली है. फ्राइडे को दैनिक जागरण आईनेक्स्ट और रेडियो सिटी के मिनेलियल्स स्पीक में चौकी चौराहा स्थित इनरव्हील क्लब ऑफ बरेली ग्लो की महिलाओं और युवाओं ने अपनी बात रखी और खुलकर बताया कि उन्हें कैसी सरकार चाहिए.

महिलाओं को किचन से मिले आजादी
डिबेट में गीता देवल ने कहा कि हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, लेकिन अभी भी महिलाओं को सिर्फ यह समझा जाता है कि उन्हें तो सिर्फ किचन ही संभालनी है. महिलाओं के लिए कोई अपॉच्र्यूनिटी नहीं मिल पाती है. इस पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए. कुछ ऐसा रूल बनाना चाहिए जिससे महिलाएं सिर्फ किचन तक ही सीमित न रह जाएं. डॉ. चारू मेहरोत्रा ने कहा कि इस बारे में लोगों को भी अपनी मेंटिलिटी चेंज करनी होगी कि वो महिलाओं को सिर्फ किचन में काम करने वाली ही न समझे. उन्हे आगे बढ़ने का भी मौका दें.

प्रशासन को जो करे टाइट
इसी बीच डॉ. अल्का मार्च ने कहा कि सरकार ऊपर से बहुत कानून और नियम लागू करती है, लेकिन निचले स्तर तक आते-आते वो कहां गायब हो जाते हैं कुछ पता नहीं चलता है. सरकार जो भी नियम या कानून बनाए उन्हें ढंग से लागू कराए. जिस दिन सभी नियम और कानूनों को पालन होने लगेगा सरकार की बुराईयां खत्म हो जाएंगी. इसी बीच इंदु आर्य ने कहा कि इस समय कानून और नियमों की किस तरह से धज्जियां उड़ी हुई हैं वो तो जनता को अच्छे से पता है. अचानक पुलिस या प्रशासन की मदद की आवश्यकता पड़ जाए तो नहीं मिलती है. पुलिस की डायल 100 सेवा तत्काल एक्शन के लिए बनाई गई है. लेकिन यदि डायल 100 को बुलाना चाहो तो वो 10 मिनट की जगह 30 मिनट में आती है. तब तक मदद की जरूरत भी खत्म हो जाती है. ऐसे पुलिस प्रशासन से क्या फायदा.

रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं
दीक्षा ने कहा कि सभी बातें ठीक हैं महिलाओं की सुरक्षा होनी चाहिए. प्रशासन टाइट होना चाहिए. सब बाते जरूरी है. लेकिन इन सब के बीच सबसे अहम बात यह है कि जब तक युवा को रोजगार नहीं मिलेगा तब तक इन सभी चीजों को भी क्या फायदा. आज का युवा पहले से काफी सशक्त है, लेकिन वो मात खाता है तो सिर्फ रोजगार की फील्ड में. इसलिए आज के युवा को रोजगार सबसे ज्यादा जरूरी है. इस बार उस सरकार को वोट दिया जाएगा जो युवाओं के बारे में सोचे और युवा पीढ़ी पर सरकार का फोकस रहे.

कड़क मुद्दा
अब देश के युवा को वो सरकार नहीं चाहिए जो केवल अपनी जेब भरे. युवाओं को अब उस सरकार का इंतजार है. जो उनके ऊपर फोकस रखे और उनकी मजबूरी और जरूरतों को अच्छे तरीके से समझे. क्योंकि आज का युवा पढ़ाई लिखाई करने के बाद भी बेरोजगारी की मार झेल रहा है. युवा चाहता है कि वो जितना एजुकेटेड है उसे उसी हिसाब की जॉब मिले.

मेरी बात
हम सब एजुकेटेड हैं. घर, परिवार सभी को समझते हैं लेकिन सिर्फ एक ही जगह मार खाते हैं वो है रोजगार. कभी कभी तो लगता है कि इतना पढ़ने के बाद भी अगर रोजगार नहीं मिला तो क्या फायदा इस पढ़ाई का और क्यों खर्च किया इस पढ़ाई में. इसलिए जो सरकार हमारी परेशानी को समझेगी उसे वोट करूंगी.

 

इलमा खान

न तो लोग और न ही सरकार कभी महिलाओं को किचन में काम करने वाली न समझें. महिलाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए. इसलिए अबकी बार वो ही सरकार चुनेंगे जो महिलाओं का भी ध्यान रखे.

गीता देवल

शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि सरकारी स्कूल में जो भी टीचर हैं उनके लिए सख्त नियम बनाए जाएं. अधिकांश टीचर्स सिर्फ सैलरी लेने के लिए ही स्कूल में आते हैं. बाकी पढ़ाई लिखाई से उन्हे कोई मतलब नहीं है. जब तक उनके लिए कुछ नियम कानून नहीं होंगे तब तक कुछ नहीं होगा.

दीक्षा अग्रवाल

-सभी सरकारी स्कूलों को किसी प्राइवेट एनजीओ के हाथों में दे दिया जाए. क्योंकि सरकार से ज्यादा तो प्राइवेट सेक्टर वाले उसे ज्यादा अच्छा चला सकते हैं या फिर सरकार कुछ ऐसे नियम बनाए कि सरकारी टीचर्स उनका उल्लंघन ही न कर पाएं.

भावना सिंह

बेरोजगारी की हालत तो देश में ऐसी है कि सरकार यदि कोई एक बैकेंसी निकाले तो उसे भरने के लिए भी भीड़ जमा हो जाती है. ऐसे में सरकार को यह देखना होगा कि कौन उसके लिए सही दावेदार है. बिना नॉलेज के सिर्फ पैसों पर किसी का सलेक्शन नहीं करना चाहिए.

कनक

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-महिलाओं की सुरक्षा के बारे में सरकार को सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए. जिससे हर महिला को सरकार के प्रति थोड़ा भरोसा बढ़े. उसे लगना चाहिए कि यदि कोई भी उनकी मदद नहीं करेगा तो वो नेता उनकी मदद करेगा जिसे उन्होने वोट दिया था.

मंजू शर्मा

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-लोकल स्तर पर भी कुछ ऐसे प्लान को जेनरेट होना चाहिए, जिससे युवाओं को रोजगार मिले. हमारे शहर में दो तीन फैक्ट्रियां ऐसी होनी चाहिए जिसमें कुछ न कुछ नया बने और वहां पर युवा को रोजगार मिले.

रचना शर्मा

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- बच्चे पढ़ते हैं और पढ़कर घर पर बैठ जाते है. क्योंकि जहां उन्हे नौकरी चाहिए वहां नौकरी से पहले पैसा चाहिए और कई पेरेंट्स ऐसे है जो उतना पैसा अफोर्ड नहीं कर पाते जिसकी वजह से बच्चों को नौकरी नहीं मिल पाती है.

अंशु देवल

बिना समझे किसी भी नेता को वोट नहीं करना चाहिए. क्योंकि जब तक हम नेता को अच्छी तरह से समझ नही लेते तब तक वोट करने से भी कोई फायदा नहीं है.

सीमा देवल

वो प्रत्याशी हमे बिल्कुल भी नहीं चाहिए जो वोट से पहले ही लोगों को अपने लालच में फंसाए. क्योंकि जो नेता पहले अपने फायदे के लिए जनता को लालच देगा वो बाद में कुछ भी नहीं कर सकता.

कुमकुम शर्मा

-चुनाव के समय में नेता आपके घर, मौहल्लों में हजारों चक्कर काट जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गलियों को भूल जाते हैं. उन्हे यह भी याद नहीं रहता कि वो कौन सी गली में गए थे.

इंदु आर्य

सतमोला खाओ कुछ भी पचाओ
आज के युवा किस स्थित से गुजर रहे हैं यह बात सिर्फ युवा ही अच्छे से जान सकते हैं और उसको झेल भी रहे हैं. क्योंकि जितना पैसा उन्होने अपनी एजुकेशन को कंपलीट करने में लगा दिया. उतना पैसा अब वो कमा नहीं रहे हैं. क्योंकि उन्हे रोजगार ही नहीं मिला. इसलिए सरकार को यह समझना चाहिए कि उनकी सरकार सिर्फ युवाओं से ही है इसलिए सरकार को युवाओं के लिए योजनाएं बनानी चाहिए.