-सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा कर 46 लाख रुपये हड़पने वाला जालसाज गैंग दबोचा गया

-गैंग का मास्टरमाइंड पेशे से वकील, चार महिलाएं भी थीं गोरखधंधे में शामिल

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LUCKNOW

गरीबों के लिये समाज कल्याण विभाग व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित अलग-अलग योजनाओं का 46 लाख रुपया जालसाजों के गैंग ने हड़प लिया. इसके लिये सुहागनों को विधवा बताया गया और कुंवारी युवतियों की शादी के नाम पर भी हेराफेरी की गई. एसपी ट्रांसगोमती की सर्विलांस सेल व महानगर पुलिस ने जालसाज गैंग का खुलासा करते हुए मास्टरमाइंड समेत पांच लोगों को अरेस्ट किया है. गिरफ्त में आया मास्टरमाइंड पेशे से वकील है.

गारंटर बन फंस गया

एसपी टीजी हरेंद्र कुमार के मुताबिक, बीती 21 अगस्त को जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने महानगर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी. जिसमें उन्होंने त्रिवेणी नगर निवासी बोधराम व अन्य लोगों पर विभाग की अलग-अलग योजनाओं के लिये दी जाने वाली सरकारी धनराशि को गलत तरह से लेने और रकम हड़पने की बात कही गई थी. पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि बैंक ऑफ इंडिया की खुर्रम नगर शाखा के जिन अकाउंट्स के जरिए रकम हड़पी गई वे सभी अकाउंट फर्जी दस्तावेज के आधार पर खोले गए थे. इन सभी बैंक अकाउंट का गारंटर खुद बोधराम ही था. पुष्टि होते ही पुलिस ने बोधराम को राडार पर ले लिया.

फर्जीवाड़ा देख हैरान रह गए

पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि बोधराम पेशे से वकील है. उसने समाज कल्याण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की तमाम योजनाओं का फर्जी ढंग से फायदा उठाया. उसने कई सुहागन महिलाओं को विधवा दिखाकर उनके नाम से अकाउंट खोले और सरकार से सहायता राशि ले ली. इतना ही नहीं, बोधराम ने कई युवतियों की शादी के लिये सरकार से मिलने वाली अनुदान राशि भी विभाग से लेकर हड़प कर ली. फर्जीवाड़ा देख पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए. आरोपों की पुष्टि होने पर शुक्रवार को एसपी टीजी की सर्विलांस सेल प्रभारी इंस्पेक्टर अजय त्रिपाठी व इंस्पेक्टर महानगर विकास पांडेय की संयुक्त टीम ने बोधराम, उसके साथ काम करने वाली गुडंबा निवासी आएशा, बोधराम के गांव में रहने वाली तीन महिलाओं सीतापुर निवासी सुमन, कौशल्या और कुसुमा को अरेस्ट कर लिया.

इंस्पेक्टर अजय त्रिपाठी ने बताया कि बोधराम व उसका गैंग कितनी बड़ी तादाद में फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके पास से अलग-अलग महिलाओं के नाम की 128 बैंक पासबुक, अलग-अलग विभागों की 32 मुहरें, डीएल, पैनकार्ड व भारी संख्या में महिलाओं की पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ बरामद हुई.

चार साल से चल रहा था गोरखधंधा

एसपी टीजी हरेंद्र कुमार ने बताया कि पेशे से वकील बोधराम ने गुडंबा निवासी आएशा को अपना असिस्टेंट बना रखा है. पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोग बीते चार साल से अलग-अलग विभाग में गरीबों के लिये चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के तहत फर्जी ढंग से रुपये हासिल कर रहे थे. छानबीन में बोधराम व उसके गैंग द्वारा अब तक 46.70 लाख रुपये हड़पने की पुष्टि हुई है. आरोपी बड़े ही शातिराना ढंग से फर्जी नाम व दस्तावेज के आधार पर बैंकों में अकाउंट खुलवाते थे और सरकारी सहायता ट्रांसफर होते ही उसे हड़प लेते थे.

सत्यापन में सामने आया फर्जीवाड़ा

बोधराम व उसके गैंग की करतूतों पर शक तब गहराया जब पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने शादी के अनुदान के लिये किये गए 202 आवेदनों का सत्यापन किया. सत्यापन में पता चला कि आवेदकों ने जो पते भरे थे, उस नाम की युवती उस पते पर रहती ही नहीं थी. जिसके बाद विभाग ने बैंक अकाउंट्स की जांच कराई तो उनमें अधिकांश अकाउंट बैंक ऑफ इंडिया खुर्रमनगर शाखा के निकले. जिसके बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई.

कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

समाज कल्याण विभाग और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की अलग-अलग योजनाओं में हुए लाखों के फर्जीवाड़े पर पुलिस की शक की सुई इन दोनों विभागों के कर्मचारियों पर भी टिक गई है. बताया जा रहा है कि पुलिस गुपचुप ढंग से इन दोनों विभागों के कर्मचारियों की भी जांच कर रही है कि उनका बोधराम से कोई संबंध तो नहीं, या फिर उन्होंने जानबूझकर उसे लाभ तो नहीं पहुंचाया.