छ्वन्रूस्॥श्वष्ठश्वक्कक्त्र : एनएच-33 की हालत पिछले छह सालों से जस की तस है, जबकि इस दौरान जन प्रतिनिधि इस रोड के फोरलेन के निर्माण का काम जल्द से जल्द पूरा करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन बाद में अपने वायदे भूल गए. ऐसे में न तो एनएच के फोरलेन का काम ही पूरा हो पाया है और न ही इसकी जर्जर हालत पर सरकार को तरस आ रहा है. हर दिन हजारों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं. कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसकी सुध कोई नहीं ले रहा है. हालात यह है कि सीबीआई के आदेश पर एनएच निर्माण के नाम पर हो रही गड़बडि़यों की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया.

नहीं पूरा कर सके वादा

कोल्हान की लाइफ लाइन कहे जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) 33 पर जनप्रतिनिधियों के वादे कभी खरे नहीं उतर सके. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से लेकर सांसद और विधायक तक ने एनएच-33 को लेकर कई वादे किए लेकिन इनमें से एक भी पूरे नहीं हुए. जन प्रतिनिधियों की बेपरवाही का नतीजा है कि एनएच-33 जानलेवा हो गया है. .

हर दिन हो रहे हादसे

गालूडीह से जमशेदपुर के पारडीह कालीमंदिर तक सड़क बेहद जर्जर है. इस पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं. सड़क चलने लायक नहीं बची है. इससे लोगों में नाराजगी है. सिंहभूम चैंबर आफ कामर्स पारडीह कालीमंदिर के पास एक दिवसीय धरना देकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है.

2012 से ही चल रहा फोरलेन बनाने का काम

रांची.जमशेदपुर महुलिया एनएच-33 फोरलेन हाईवे को पूरा होने में करीब दो साल लगेंगे. क्योंकि अभी काम लगभग ठप है.झारखंड की लाइफलाइन कही जाने वाली इस सड़क को एनएचएआई ने दिसंबर 2012 में सड़क बनाने का जिम्मा मधुकॉन कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया था. निर्माण कार्य को 4 जून 2015 तक पूरा कर लेना था, लेकिन आज तक रोड नहीं बन पाई है.

नेताओं का क्या हुआ वादा

1-गडकरी भी नहीं निभा सके एनएच का वादा

महुलिया से बहरागोड़ा तक एनएच-33 का शिलान्यास करने 27 जनवरी, 2016 को घाटशिला आए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंच से एलान किया था कि मार्च 2017 तक रांची से जमशेदपुर तक एनएच-33 टनाटन हो जाएगा. लेकिन, अपने वादे पर वो खरे नहीं उतर सके.

2-सांसद भी डेड लाइन में हुए फेल

सांसद विद्युत वरण महतो ने 2015 में जमशेदपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस में बोले थे कि उनकी केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से बात हुई है. 2017 तक सड़क दुरुस्त हो जाएगी. लेकिन, उनकी डेड लाइन भी सही साबित नहीं हो सकी. इसके बाद भी एनएच-33 के जल्द दुरुस्त होने के उनके बयान आते रहे. लेकिन, एनएच-33 की जानलेवा स्थिति से साफ है कि कोई भी वादे सच्चे साबित नहीं हुए.

3-सीएम का निर्माण शुरू कराने का वादा भी अधूरा

एनएच-33 पर सीएम रघुवर दास ने दो मई को दिल्ली जाकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी. बैठक में तय हुआ था कि अगर 10 मई तक मधुकॉन ने एनएच-33 के निर्माण का काम शुरू नहीं किया तो टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा. एनएचएआइ सड़क निर्माण कराएगी. लेकिन, ऐसा नहीं हो सका.

4-सड़क सुरक्षा के सदस्य भी खरे नहीं उतरे

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य रवींद्र तिवारी ने 28 जून को जमशेदपुर सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि एनएच-33 को हर हाल में ठीक कराया जाएगा. मधुकॉन पर कार्रवाई होगी लेकिन अब तक इस दिशा में सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की है.

5-पूर्व सीएम हेमंत भी नहीं बनवा सके एनएच-33

पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने भी जमशेदपुर में सर्किट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए अक्टूबर 2013 में कहा था कि एनएच-33 के निर्माण में तेजी लाई जाएगी. मधुकॉन पर शिकंजा कसा जाएगा. लेकिन, ऐसा नहीं हो सका.