- अनऑथराइज नेटवर्क यूज की वजह से एनआईसी ने बंद कर दी थी फैसिलिटी

- फाइनेंशियल ऑडिट में सामने आया सच, अब तक करीब सवा दो करोड़ हो चुका पेमेंट

- स्टेडियम की तरह ही नहीं लिया गया है टेक्निकल सेंक्शन, एग्रीमेंट भी नहीं हुआ है साइन

कोई सिक्योरिटी मेजर्स नहीं
GORAKHPUR:
यह बातें सामने आई हैं यूनिवर्सिटी के फाइनेंशियल ऑडिट में. जहां जांच के दौरान काफी खामियां पाई गई हैं. जिसकी रिपोर्ट के बेसिस पर इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट डिपार्टमेंट ने शासन के जरिए यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों से इसका जवाब तलब किया है. इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. यूनिवर्सिटी में वाई-फाई फैसिलिटी स्टार्ट तो कर दी गई थी, लेकिन जिस तरह यूनिवर्सिटी के स्टेडियम में काफी खामियां मिली थीं, इसमें भी वैसी ही दिक्कतें सामने आई हैं. हैकिंग और अनऑथराइज एक्टिविटी को रोकने के लिए जहां कोई सिक्योरिटी मेजर्स नहीं अपनाए गए, वहीं जिम्मेदारों ने कार्यदायी संस्था को खुली आजादी देते हुए किसी तरह के दस्तावेज पर सिग्नेचर नहीं कराए. यानि कि बिना किसी टेक्निकल सेंक्शन और बिना एग्रीमेंट के ही काम शुरू करा दिया गया.

डॉक्युमेंट्स पर भी सिग्नेचर नहीं
गवर्नमेंट ने फाइनेंशियल सेंक्शन करने के दौरान यह स्पेसिफाई किया था कि बिना डीटेल्ड एस्टिमेट बनाए और बिना किसी टेक्निकल अथॉरिटी के सेंक्शन काम नहीं शुरू किया जाएगा, जबकि यूनिवर्सिटी में यह काम शुरू कर दिया गया. इतना ही नहीं, ऑडिट में यह भी बात सामने आई है कि यूनिवर्सिटी और कार्यदायी संस्था के बीच न तो एग्रीमेंट ही हुआ और न ही दस्तावेजों पर जिम्मेदारों के सिग्नेचर ही हैं. वहीं काम में देर होने पर न तो किसी की लाइबिल्टी तय की गई है और न ही पेनाल्टी क्लॉज का ही जिक्र है.

सवा दो करोड़ हो गया पेमेंट
शासन की ओर से वाई-फाई के लिए 2.14 करोड़ रुपए स्वीकृत हुआ. यूपी राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) को काम सौंपा गया. इसमें कार्यदायी संस्था को मार्च 2014 में ही 1.06 करोड़ रुपए पेमेंट कर दिया. इसके बाद निर्माण कार्य तो शुरू हो गया. वहीं जुलाई 2015 में सेंक्शन 1.08 करोड़ का पेमेंट दिसंबर 2015 में कर दिया गया. फरवरी 2015 से यूनिवर्सिटी के दो हॉस्टल में इसकी फैसिलिटी भी मिलने लग गई. लेकिन ऑडिट में यह बात सामने आई कि महज तीन मंथ यानि मई 2015 में एनआईसी ने टेक्निकल सिक्योरिटी न होने की वजह से अनऑथराइज एक्टिविटी होती पाई और इससे उन्होंने इंटरनेट फैसिलिटी पर रोक लगा दी, जो अब तक बहाल नहीं हो सकी है.

अखिलेश यादव ने दी थी सौगात
गोरखपुर यूनिवर्सिटी को मार्च 2013 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने स्टेडियम के साथ ही वाई-फाई की सौगात दी थी. यूनिवर्सिटी में ऑर्गनाइज फ‌र्स्ट साइंस कांग्रेस में पहुंचे सीएम ने सौगातों का पिटारा खोलते हुए इसकी मंजूरी दी थी. यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों ने करीब 484.89 लाख रुपए से स्टेडियम बनना था, वहीं 2.14 करोड़ से वाई-फाई की फैसिलिटी शुरू होनी थी.

खुद वाई-फाई दे रहा है यूनिवर्सिटी
शासन की ओर से मिली वाई-फाई फैसिलिटी के लिए इंस्ट्रूमेंट्स भले ही हॉस्टल्स में इंस्टॉल किए जा चुके हों, लेकिन स्टूडेंट्स को वाई-फाई फैसिलिटी यूनिवर्सिटी अपने लेवल से प्रोवाइड करा रहा है. जिम्मेदारों की मानें तो इसमें इंटरनेट के साथ ही सिक्योरिटी मेजर्स यूनिवर्सिटी लेवल पर लगाए गए हैं और उसकी मॉनीटरिंग वहीं से हो रही है. जबकि शासन की ओर से शुरू की जाने वाली वाई-फाई फैसिलिटी को अब भी शुरू होने का इंतजार है. इसके लिए यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं.

क्‍या कहते हैं अफसर
कुछ टेक्निकल गड़बडि़यां सामने आई थीं, जिसकी वजह से वाई-फाई फैसिलिटी बंद चल रही है. ऑडिट में यह बात सामने आई है कि कार्यदायी संस्था ने सिक्योरिटी मेजर्स को नजरअंदाज किया है. इसके लिए कार्यदायी संस्था के जिम्मेदारों से बातचीत की जा रही है और खामियों को दूर कर उन्हें वर्क कंप्लीट कराने के निर्देश दिए गए हैं.

- बीरेंद्र चौबे, फाइनेंस ऑफिसर, डीडीयूजीयू