मलेरिया: बरसात के मौसम में होने वाले सभी रोगों में सबसे आम मलेरिया है। मलेरिया को साधारण नहीं समझना चाहिए ये दुनिया की सबसे जानलेवा बीमारियों में से एक है। म‍लेरिया मादा एनाफलीज मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है। यह रोग लाल रक्त कोशिकाओं में प्रोटोजोवा नाम का परजीवी पैदा हो जाने से यह फैलता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले तो अपने घर के अंदर और आसपास पानी जमा होने से रोकें। इसके साथ ही मच्‍छर के काटने से खुद का बचाव करने के लिए रात को सोते समय मच्छरदानियों का प्रयोग करें। डीडीटी का छिड़काव करायें। सबसे अहम् बात अगर मलेरिया के लक्षण दिखायी दें तो लापरवाही ना बरतें तुरंत डाक्‍टर को दिखायें।

जाने मानसून में होने वाली पांच बीमारियां और कैसे करें उनकी रोकथाम

हैजा: हैजा एक और बीमारी है जो काफी खतरनाक है मानसून में हो सकती है। आमतौर पर यह बीमारी दूषित पानी और भोजन के माध्‍यम से इस मौसम में फैलती है। घर के अंदर और बाहर स्‍वच्‍छता की कमी रोग को फैलने में मदद करती है। इस रोग के होने पर रोगी को दस्त और उल्टियां अधिक आने लगते हैं। पेट में दर्द बढ़ने लगता है। रोगी को बैचैनी महसूस होती है और बहुत प्यास लगने लगती है। वैसे तो टीकाकरण इस रोग से बचाव का सबसे अच्‍छा उपाय है, इसका असर लगभग 6 महीने तक रहता है। इसके साथ ही कुछ और बातें भी ध्‍यान रख्‍ों जैसे पीने से पहले पानी को उबाल लें। घर और आस-पास साफ-सफाई का ध्‍यान रखें। फिर भी अगर हैजा हो जाता है तो उसे ओरल रिहाइड्रेशन तुरंत दिया जाना चाहिए। समय पर उपचार रोगी के लिए बहुत जरूरी है क्‍योंकि चिकित्सा में देरी जीवन को खतरे में डाल सकती है।

टाइफाइड: मानसून के दौरान टाइफाइड हाने का खतरा भी रहता है। संक्रमित पानी और खाद्य पदार्थों के जरिए इस रोग के होने की संभावना सबसे अधिक होती है। इस बीमारी में तेज बुखार आता है, जो घटता बढ़ता रहता है और कई दिनों तक बना रहता है। इस बीमारी की सबसे खतरनाक बात यह है कि व्‍यक्ति के ठीक होने के बाद भी संक्रमण रोगी के पित्ताशय में बना रहता है, जो खतरा पैदा कर सकता है। इस रोग से पी‍ड़‍ित व्‍यक्ति को परिवार के अन्‍य सदस्‍यों से दूर रहना चाहिए क्‍योंकि यह एक संक्रामक रोग होता है। मानसून के दौरान बीमारी को रोकने के लिए टीकाकरण लेना बहुत जरूरी होता है। साथ ही इस बीमारी से बचने के लिए बरसात के दिनों में लिक्‍विड डाइट भरपूर मात्रा में इस्‍तेमाल करनी चाहिए।

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हेपेटाइटिस ए: एक वाइरल डिसीज है हेपेटाइटिस ए। यह बीमारी इंफेक्‍टैड खाने, पानी और इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। पीलिया, थकावट, भूख न लगना, मिचली, हल्का बुखार, पीले रंग का यूरीन और सारे शरीर में खुजली इसके आम लक्षण है। इस घातक बीमारी को रोकने के लिए टीकाकरण करवाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही हाइजनिक फूड और पानी का इस्‍तेमाल जरूरी है। हेपेटाइटिस के मरीज को पूरा आराम दिया जाना चाहिए और उसे अपने आहार में उच्च कैलोरी लेनी चाहिए।

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सर्दी, जुकाम, बुखार: मानसून के दौरान सर्दी, जुकाम और बुखार का होना सबसे सामान्‍य है। किसी भी आयु वर्ग के व्‍यक्ति को इस मौसम में इस समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है। बुखार, गले में खराश और लगातार छींकना इस बीमारी के कुछ लक्षणों में से हैं। इस संक्रमण के प्रकोप से अपने आपको बचाने के लिए सबसे अच्‍छा तरीका है कि बारिश में भीगने से बचा जाये। एयर कंडीशनर को सामान्‍य तापमान पर चलाये और बहुत अधिक ठंडे या बर्फ की तरह जमे फूड आइटम्‍स से परहेज करें।

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