-पहाडि़या की रामसखी देवी के चार बेटे कमा रहे देश सेवा में नाम

-मुसीबतों और कठिनाइयों का फल बच्चों की सफलता से मिला

हर मां चाहती है कि उसका बच्चा खूब शोहरत कमाए. पल भर के लिए भी उसे उसकी आंखों से ओझल न हो. मगर जब बात देश सेवा की बात होती है तो वही मां उसी बेटे को देश पर न्यौछावर करने से भी नहीं हिचकती है. नौ दुर्गा की पांचवीं स्वरूप स्कंदमाता माता ऐसी ही हैं. शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन हम इनकी अराधना करते हैं. मान्यता है कि इनकी अराधना मात्र से ही सम्पूर्ण दुखों का नाश होता है. यह रूप ऐसी मां का प्रतीक है, जो अपने संतान को नेतृत्व करना सिखाती है और साहसी बनाती है. मातृभूमि की रक्षा के लिए उनका प्राण भी न्यौछावर कर सकती है.

ऐसी ही मां है रामसखी देवी है. सारनाथ रोड पर स्थित पहाडि़या की रहने वाली इस महिला के चार सपूत देश की रक्षा करने से लेकर समाजसेवा की सेवा बड़ा योगदान दे रहे हैं.

बेटों पर करती है गर्व

रेलवे से रिटायर चंद्रशेखर सिंह की पत्‍‌नी रामसखी देवी के शुरूआती दिन कष्टकारी रहे लेकिन उनका आत्मविश्वास व मनोबल कभी भी नहीं डगमगाया. चार बेटों की मां रामसखी देवी ने बच्चों के करियर को लेकर जैसा सोचा था ठीक वैसा ही साकार किया. डॉ. राजेश सिंह व डॉ. राकेश सिंह दोनों बेटे डॉक्टर और एक बेटा राघवेंद्र प्रताप सिंह 95वीं बटालियन सीआरपीएफ और एक बेटा धनंजय सिंह सामाजिक क्षेत्रों में नाम कमा रहा है. आचरण, व्यवहार और कुशलता के धनी चार बेटों को पालने में जितनी कठिनाइयां रामसखी देवी ने झेली थी लेकिन अब उतना ही गर्व भी करती हैं परिश्रम और तप की भट्ठी से सोना निकालने वाली रामसखी जब घर से बाहर या किसी समारोह में शिरकत करती है तो सपूतों की मां कहकर पुकारी जाती हैं. समाज में आदर व सम्मान उन्हें गौरवांवित करता है.