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PATNA/CHAPRA : गरीबी के आगे कैसे आदमी बेबस हो जाता है। इसका जीता जागता उदाहरण छपरा के सिताब दियरा में देखने को मिला जहां गरीबी से तंग आकर एक मां ने अपने कलेजे के दो टुकड़े को एक-एक कर गंगा में फेंक दिया। लेकिन उपर वाले को कुछ और ही मंजूर था जब वह एक अन्य बच्ची के साथ गंगा में अपनी इहलीला समाप्त करने ही वाली थी कि लोगों ने उसे पकड़ लिया।

गरीबी ने बना निर्दयी

घटना बुधवार को मांझी स्थित यूपी-बिहार को जोडऩे वाले जय प्रभा सेतु पर लगभग 10 बजे सुबह की है। गरीबी और आर्थिक तंगी ने एक मां को निर्दयी बना दिया। अपने दो बच्चों को मां ने एक-एक कर गंगा में फेंक दिया। जैसे ही वह गंगा में कूदने लगी तब कुछ लोगों ने उसे पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया घटना के सम्बंध में महिला ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वह अंदर से टूट चुकी हैं। अब उसे जीने की कोई चाह नहीं है। वह बच्चों को पाल नही सकती तो अब उसके सामने बस बच्चों की हत्या और आत्महत्या ही एकमात्र विकल्प दिखाई दिया।

पति करता था मारपीट

अभागी मां मनोरमा देवी की शादी मांझी थाना क्षेत्र के ताजपुर फुलवरिया निवासी बुनी लाल राम के पुत्र अमरजीत राम से हुई थी। दोनों में बराबर झगड़ा होता रहता था। जिसकी शिकायत अपने मायके वालों से करती। उसके मायके वाले समझा बुझा कर चले जाते। कुछ दिन ठीक रहता फिर वही होता रहता। मारपीट का दौर चलता रहा। सास विद्यावती देवी और ससुर प्रताडि़त करते रहे। पति अमरजीत भी शराब पीकर घर पहुंचता और उसकी जमकर पिटाई कर देता। महिला ने बताया कि तीन दिन से उसकी तबीयत खराब चल रही है। मंगलवार रात इलाज व काम को लेकर पति से झगड़ा हो गया और पति ने पिटाई कर दी। पिटाई से तंग आकर महिला ने तीन बच्चों के साथ अपने जीवन को ही समाप्त करने का फैसला लिया।

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