पीएम मुद्रा योजना

50 हजार में रोजी कमाना मुश्किल

पीएम मुद्रा (माइक्रो यूनिट डेवलपमेंट एंड रि-फाइनेंस एजेंसी) योजना की शुरुआत पीएम नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल, 2015 को की थी. इसके तहत छोटे व्यापारियों, रीटलर्स, स्वयं सहायता समूह और आम लोगों के लिए रोजगार सृजन के लिए छोटे व मध्यम लोन दिये जाते हैं. बरेली में 30 मार्च, 2018 तक तकरीबन 15230 लोगों को मुद्रा योजना के तहत बैंकों से लोन लिया, लेकिन इनमें लगभग 56 प्रतिशत ने 50 हजार से कम का लोन लिया. अब 50 हजार रुपए में रोजगार सृजन के सच पर ही सबसे बड़ा सवाल खड़ा है.

लोन कैटेगरी -कुल संख्या - बकाया

शिशु 8598 50.71 करोड़

किशोर 5557 103.74 करोड़

तरुण 1076 60.12 करोड़

* आंकड़े 31 मार्च, 2018 तक

शिशु लोन (50,000 रुपए तक)

किशोर लोन (50,001 से 5 लाख रु. तक)

तरुण (5,00001 से 10 लाख तक)

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पाई बनेगा..

आधे से ज्यादा लोन 50 हजार से कम

शिशु--56.45 प्रतिशत

किशोर--36.48 प्रतिशत

तरुण--7.06 प्रतिशत

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कड़वा सच:

1- नियमानुसार शिशु लोन के तहत 50 हजार से ज्यादा लोन नहीं दिया जा सकता, लेकिन 30 मई, 2018 तक शिशु लोन लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर 59 हजार से ज्यादा का बकाया है. स्पष्ट है ज्यादातर लोगों ने समय पर लोन वापस नहीं किया. मतलब वे इस लोन के जरिए अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सके.

2- किशोर श्रेणी का लोन लेने वाले प्रत्येक लाभार्थी पर आज की तरीख में लगभग 1.85 प्रतिशत का बकाया है. स्पष्ट है ज्यादातर लोगों को लोन की अधिकतम सीमा यानि पांच लाख रुपए से काफी कम लोन दिया गया.

चुनौतिया:

- शिशु लोन यानि 50 हजार रुपए तक के लोन लेने वाले यथार्थ में रोजगार पा सकें.

- शिशु और किशोर लोन लेने वालों से रिकवरी एक बड़ा मुद्दा.

- बरेली में बेरोजगारों यानि सक्रिय रूप से नौकरी तलाश रहे लोगों की संख्या 80 हजार से ज्यादा है. मुद्रा योजना शुरू होने के तीन वर्ष बीतने के बावजूद इस आकड़े में कमी नहीं आई.